सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलाक-ए-बिद्दत(एक झटके में तीन तलाक) को असंवैधानिक करार दिए जाने केबाद अब सवाल है कि ट्रिपल तलाक की शिकार हुई महिलाओं के लिए आगे की राह क्या होगी? चाहे वे पीड़ित याचिकाकर्ताएं हों या दूसरी अन्य महिलाएं।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ट्रिपल तलाक की शिकार शायरा बानो, आफरीन रहमान, आतिया साबरी, इशरत जहां और गुलशन परवीन पहुंची थी। इंसाफ के लिए तो ये पांच ही महिलाएं थी लेकिन कई अन्य महिलाएं भी इसकी शिकार हुई हैं।
गौर करने वाली बात है कि इन याचिकाकर्ताओं में वे भी शामिल हैं जिनकेपति ने या तो स्पीड पोस्ट से या तो स्टांपपेपर या फोन के जरिए ट्रिपल तलाक लिया। एक पति ने तो सादे कागज पर तीन बार तलाक लिखकर पत्नी से संबंध तोड़ दिया।
सवाल यह है कि ट्रिपल तलाक की शिकार महिलाओं के लिए आगे का रास्ता क्या होगा? चूंकि आदेश में इस बात को जिक्रनहीं है इसलिए यह देखने वाली बात होगी कि इन महिलाओं के पास क्या कानूनी विकल्प होगा।
साथ ही चूंकि इस आदेश का प्रभाव भविष्यलक्षी होगा न कि भूतलक्षी, लिहाजा उनकेलिए मौजूद विकल्प को लेकर स्पष्टता नहीं है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस आदेश केबाद ट्रिपल तलाक की शिकार महिलाएं भरणपोषण केलिए अदालत का दरवाजा खटखटका सकती है।