फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SNDP: केरल उच्च न्यायालय ने एसएनडीपी योगम पदाधिकारियों की अयोग्यता पर रोक लगाई, कामकाज में हेरफेर का था आरोप

Mon, 23 Mar 2026 02:19 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एसएनडीपी योगम पदाधिकारियों की अयोग्यता पर रोक लगाई। वेल्लापल्ली नटेसन समेत नेताओं को राहत मिली, मामला कंपनी अधिनियम के तहत अधिकार क्षेत्र विवाद से जुड़ा है।

विज्ञापन
नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को केरल हाईकोर्ट ने दी गर्भपात कराने की अनुमति - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आज  श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम के सभी पदाधिकारियों और निदेशक मंडल की अयोग्यता के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश में संगठन के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन भी शामिल थे। यह रोक कंपनी अधिनियम के तहत वैधानिक आवश्यकताओं का कथित तौर पर पालन न करने के आरोप में लगाई गई थी।

संगठन पर कामकाज में अनियमितताओं का लगा था आरोप

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम की खंडपीठ ने न्यायमूर्ति टी आर रवि द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाई। यह आदेश दिवंगत प्रोफेसर एम के सानू सहित कई याचिकाओं पर आया था, जिनमें संगठन के कामकाज में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। एसएनडीपी योगम केरल में एझावा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख सामुदायिक संगठन है। एकल पीठ ने नटेसन के अलावा थुशार वेल्लापल्ली, एम एन सोमन और संतोष (जिन्हें अरायक्कंडिल संतोष के नाम से भी जाना जाता है) को भी निदेशक मंडल से अयोग्य घोषित किया था। नटेसन और अन्य ने खंडपीठ का रुख करते हुए तर्क दिया था कि रिट याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं, क्योंकि निदेशकों की अयोग्यता और कंपनी के प्रबंधन का मुद्दा कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है।

पिछली बार इस मामले पर 19 मार्च को सुनवाई हुई थी। उस समय खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि निदेशकों की नई सूची जारी होने तक यथास्थिति बनाए रखी जाए। हालांकि, अब मामले पर दोबारा विचार करने के बाद खंडपीठ ने यह रोक लगाई है।

विवाद का कारण

दिवंगत प्रोफेसर एम के सानू सहित कई याचिकाओं में संगठन के कामकाज में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। एकल पीठ ने कंपनी अधिनियम के तहत वैधानिक आवश्यकताओं का पालन न करने के आरोप में पदाधिकारियों को अयोग्य ठहराया था। नटेसन और अन्य ने तर्क दिया कि निदेशकों की अयोग्यता का मामला राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि रिट याचिकाएं इस मामले में सुनवाई योग्य नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें