राजीव चंद्रशेखर, आईटी राज्यमंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने भारतीय आतिथ्य और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
देश के आतिथ्य क्षेत्र में नई जान फूंकने और उसे दुनियाभर में पहचान दिलाने वाले दिग्गज होटल कारोबारी पृथ्वीराज सिंह ओबेरॉय का मंगलवार को निधन हो गया। वह 94 साल के थे। बिकी के नाम से मशहूर ओबेरॉय समूह के मानद चेयरमैन ने अपने जीवनकाल में 32 होटल की विशाल शृंखला खड़ी की। 3 फरवरी, 1929 को नई दिल्ली में जन्मे ओबेरॉय 1988 से लेकर मई, 2023 तक कंपनी के चेयरमैन रहे।
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39 साल पहले संभाली थी कमान
द ओबेरॉय समूह के संस्थापक व पृथ्वीराज सिंह के पिता राय बहादुर एमएस ओबेरॉय ने 1934 में यह कारोबार शुरू किया था। 2002 में उनका निधन हो गया। राय बहादुर के बड़े बेटे तिलक राज का 1984 में निधन हो गया था। पृथ्वी राज सिंह ने 39 साल पहले यानी 1984 में अपने पिता की जगह ली और उनकी विरासत को आगे बढ़ाया।
ये मिले थे सम्मान...
पर्यटन और आतिथ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2008 में पद्म विभूषण।
असाधारण नेतृत्व और दूरदर्शिता के लिए इंटरनेशनल लग्जरी ट्रैवल मार्केट (आईएलटीएम) में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड। होटल्स (मैगजीन) यूएसए ने कॉरपोरेट होटेलियर ऑफ द वर्ल्ड पुरस्कार से नवाजा।
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बर्लिन में छठे इंटरनेशनल होटल्स इन्वेस्टमेंट फोरम ने प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।
फोर्ब्स इंडिया लीडरशिप अवार्ड समेत कई अन्य पुरस्कार से भी नवाजा गया।
राजीव चंद्रशेखर, आईटी राज्यमंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने भारतीय आतिथ्य और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
दुनियाभर में आतिथ्य क्षेत्र के सच्चे दिग्गज थे ओबेरॉय
ओबेरॉय न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में आतिथ्य क्षेत्र के सच्चे दिग्गज थे। वह समूह को उस स्तर पर ले गए, जो अभूतपूर्व था। उनकी दूरदर्शिता व लगन का ही नतीजा था कि एक साल होटलों की शीर्ष-4 रैंकिंग में चारों होटल ओबेरॉय समूह के ही थे। मुझे वह साल याद है और उन्हें उस उपलब्धि पर काफी गर्व था। मुझे उनके साथ कुछ प्रोजेक्ट में काम करने का सौभाग्य मिला। अतिथि और उनके अनुभव पर उनके निरंतर और व्यापक फोकस ने इस उद्योग के लिए मानक स्थापित किए। व्यक्तिगत स्तर पर उनमें आपको हमेशा लाखों रुपये जैसा महसूस कराने की क्षमता थी। उनके साथ प्रत्येक मुलाकात में मुझे कुछ न कुछ सीखने को मिला।