आधिकारिक एप से यूजर्स की सहमति के बिना डाटा शेयर करने को लेकर राहुल गांधी ने पीएम पर निशाना साधा था।
राहुल ने ट्विटर पर कहा, ‘नमो एप ने गोपनीय तरीके से ऑडियो, वीडियो, कांटेक्ट लिस्ट और जीपीएस के जरिये यूजर के पता-ठिकाने का पता लगा लिया। मोदी का नमो एप गोपनीय ढंग से आपके मित्रों एवं परिवार से संपर्क कर रहा है। वह बिग बॉस हैं, जो भारतीयों की जासूसी करना चाहते हैं।’
राहुल ने हैशटैक ‘डिलीट नमो एप’ के साथ किए ट्वीट में कहा, ‘अब वह हमारे बच्चों का डाटा चाहते हैं। 13 लाख एनसीसी कैडेट्स को एप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया गया। वह नमो एप का इस्तेमाल अपना व्यक्तिगत डाटाबेस बनाने के लिए कर रहे हैं।’
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, प्रधानमंत्री पद का दुरुपयोग किया जा रहा है। राहुल ने कहा, ‘यदि प्रधानमंत्री प्रौद्योगिकी के जरिये संवाद करना चाहते हैं, तो कोई समस्या नहीं है। किंतु क्या इसके लिए आधिकारिक पीएमओ एप का इस्तेमाल किया जाएगा। डाटा का संबंध भारत से है, मोदी से नहीं।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल के अंदाज में ही उन पर हमला बोला। ट्विटर पर लिखा, ‘हेलो, मेरा नाम राहुल गांधी है। मैं भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष हूं। जब आप मेरे आधिकारिक एप पर आते है तो मैं आपका डेटा सिंगापुर में अपने मित्रों को देता हूं।’
मालवीय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में भी लोगों के डेटा चोरी कर चुनावी रणनीति बनाई और अब कर्नाटक में भी यही किया जा रहा है।
कांग्रेस को तकनीकी ज्ञान पर घेरा
भाजपा ने राहुल के नमो एप पर सवाल उठाने को तकनीकी अज्ञानता का श्रेष्ठ उदाहरण बताया है। पार्टी का कहना है कि ब्रिटिश एनालिटिका की मदद से अगले लोकसभा चुनाव में लोगों को प्रभावित करने की योजना के नाकाम होने के बाद उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है।
पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि इस तरह की तकनीकी अज्ञानता भारतीय राजनीति में दुर्लभ ही देखने को मिलती है। कांग्रेस अध्यक्ष पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, राहुल कल कहेंगे कि मोदी और भाजपा नमो एप के जरिये ईवीएम से जुड़े हुए हैं और चुनाव के बाद भी चुनाव जीत रहे हैं, क्योंकि उन्होंने इन्हें हैक कर रखा है।
डाटा लीक पर पीएम पर हमलावर कांग्रेस खुद उसी फेर में फंसने के बाद बैकफुट पर आ गई। पार्टी ने डाटा लीक की रिपोर्टों के बाद अपने आधिकारिक मोबाइल एप ‘विदआइएनसी’ को गूगल प्ले स्टोर से हटा लिया।
पार्टी ने ट्वीट कर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘विदआइएनसी’ एप का इस्तेमाल सिर्फ ‘सोशल मीडिया अपडेट’ के लिए किया जा रहा था।
गलत यूआरएल चलने और इससे लोगों के गुमराह होने की खबरों के बाद एप को गूगल प्ले स्टोर से हटाना पड़ा। पार्टी ने यह भी कहा कि ‘विदआइएनसी’ एप का इस्तेमाल सिर्फ सदस्यता के लिए किया जा रहा था और करीब पांच माह से यह प्रयोग में नहीं था।
एप हटाने पर सफाई भी दी
डाटा लीक मामले में लगे आरोप पर कांग्रेस प्रवक्ता डा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भाजपा कांग्रेस के एप ‘विदआइएनसी’ को डिलीट किए जाने पर भ्रम फैला रही है। दरअसल, कांग्रेस ने अपने एप को सदस्यता अभियान से जोड़ा था जिसमें मात्र 15 हजार लोगों ने इसे डाउनलोड किया।
हमारे सर्वे में पाया गया कि कांग्रेस के सदस्य बनने वाले मिस कॉल या ऑनलाइन की जगह सीधे सदस्यता की रसीद कटवाना पसंद करते हैं। हमने ऐसा लोगों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए किया है। कांग्रेस ये तो नहीं कहेगी कि वे भी अपना एप डिलीट करें लेकिन लाखों लोगों का डाटा सुरक्षित न रख पाने में उनकी सीधी जवाबदेही होगी।