सत्यनाम के पिता उसकी शादी 16 साल की उम्र में ही करने वाले थे लेकिन उसने साफ कहा कि मुझे पढ़ाई करनी है, शादी की जिम्मेदारी अभी नहीं लेना चाहता। श्रावस्ती के गिलौला ब्लॉक के खैराकलां गांव का सत्यनाम आज बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ रहा है। उसे शिक्षक बनना है।
बाल विवाह के नुकसान को सत्यनाम कायदे से समझता है। उसे मालूम है कि विवाह होते ही कई तरह की जिम्मेदारियां आ जाती हैं और उस हाल में ठीक से पढ़ाई करने में बहुत दिक्कतें सामने आती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले युवा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ नहीं पाते। अपने साथ उसने ऐसा नहीं होने दिया। शिक्षक बनने का सपना दिल में संजोए सत्यनाम आज पूरी लगने से पढ़ाई में जुटा है।
स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी कुसुमा यादव ने यह वीडियो कथा बनाई है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे।एम।सी। के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।