व्यापारियों के एक प्रमुख संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक फरवरी से कानाफूसी अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वे अपनी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों और अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों से उस पार्टी के पक्ष में वोट देने की अपील करेंगे जो उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन देगा।
कैट के मुताबिक ऑनलाइन बाजार से सात करोड़ व्यापारियों और उनके माध्यम से रोजगार पा रहे करोड़ों परिवारों के सामने भुखमरी का संकट आ गया है। वे अपने भारी पूंजी बल के दम पर छोटे व्यापारियों को बाजार से हटा रही हैं। व्यापारियों की मांग पर अब जब सरकार ऑनलाइन बाजार की मार्केट पर नियम बना रही है तो ये सरकार को यह कहकर ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही हैं कि इससे भारत में निवेश खत्म हो जाएगा।
कैट के मुताबिक इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से पहले इन व्यापारियों के माध्यम से ही देश का काम चल रहा था। कैट की अपील है कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में न आए और कंपनियों के साथ सामान्य व्यापारी को भी बराबर का अवसर दे।
देश में 7 करोड़ छोटे व्यवसाई
देश में लगभग 7 करोड़ छोटे व्यवसाई हैं। इससे लगभग 45 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। ये व्यापारी प्रतिवर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं और सरकार को भारी मात्रा में राजस्व देते हैं। लेकिन ऑनलाइन बाजार के दबाव में इस वर्ग की कमर टूट रही है। व्यापारी बराबरी का मौका पाने के लिए सरकार पर दबाव डाल रहे हैं।