विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का उपचार करा रहे मरीजों को छह सप्ताह तक ब्लैक फंगस का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। एम्स के वरिष्ठ न्यूरोसर्जरी प्रोफेसर डॉ पी शरत चंद्र ने कहा, फंगल संक्रमण नया नही है, लेकिन यह कभी महामारी की तरह नहीं फैला। इसके इस घातक स्तर पर पहुंचने के कारण का अभी ठीक-ठीक कारण का पता नहीं चला है।
उन्होंने कहा कि हालांकि इसके अनेक कारण हो सकते हैं। इसकी एक सबसे खास वजह है मरीज के ऑक्सीजन पर होने के दौरान अनियंत्रित मधुमेह में स्टेरॉयड के साथ टोसिलीजुमाब का इस्तेमाल।
उन्होंने कहा कि यदि कोरोना के उपचार के छह हफ्तों तक यदि मरीज में ऐसा कोई कारण नजर आता है, तो उनमें ब्लैक फंगस का सबसे ज्यादा खतरा हो सकता है। डॉ चंद्र ने चेताया कि इसके मरीज को ऑक्सीजन सिलिंडर से सीधे ठंडी ऑक्सीजन देना बेहद खतरनाक हो सकता है।
कहां कितने मरीज
| राज्य |
मरीज |
वॉयल |
| मध्य प्रदेश |
720 |
1830 |
| राजस्थान |
700 |
1780 |
| कर्नाटक |
500 |
1270 |
| हरियाणा |
250 |
640 |
| उत्तर प्रदेश |
112 |
380 |
| पंजाब |
95 |
320 |
| छत्तीसगढ़ |
87 |
300 |
| बिहार |
56 |
190 |
बिहार में ब्लैक फंगस महामारी घोषित
बिहार में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है। इसे एपिडेमिक डिजीज एक्ट में शामिल करते हुए इलाज के लिए राज्य और केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। मरीजों के बेहतर इलाज के लिए दवाओं को स्टोर किया जा रहा है।
राजधानी पटना के आईजीआईएमएस, एनएमसीएच और एम्स में मरीजों का इलाज होगा। बिहार में लगातार ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। एक महीने में इसके 100 से ज्यादा मरीज मिले हैं।
इंजेक्शन भेजे, तब तक बढ़ गए मरीज
केंद्र सरकार ने जो आंकड़ा बताया है, उसकी तुलना में राज्यों में मरीजों की संख्या अधिक है। केंद्र के अनुसार दिल्ली में 197 मरीजों का इलाज जारी है। हकीकत ये है कि दिल्ली के आठ अस्पतालों में 228 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।
एम्स दिल्ली और झज्जर परिसर में 90, अपोलो में 25, मैक्स में 30, गंगाराम अस्पताल में 55, मणिपाल में 13, आकाश अस्पताल में पांच और फोर्टिस वसंतकुंज अस्पताल में 10 मरीज भर्ती हैं। दिल्ली सरकार के अधीन 33 अस्पतालों की जानकारी इसमें नहीं है।
दरअसल, केंद्र ने पुराने आंकड़े के आधार पर इंजेक्शन भेजे, तब तक मरीज बढ़ गए। इसीलिए केंद्र और राज्य के आंकड़े में अंतर दिख रहा है।
पुणे में 353 मरीज
कोरोना के साथ ब्लैक फंगस के मामले पुणे में तेजी से बढ़ रहे हैं। शनिवार को जिला प्रशासन ने बताया कि पुणे में ब्लैक फंगस के कुल मरीजों की संख्या 353 हो गई है, जबकि अब तक 20 मरीजों की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों का कहना है, 300 मरीजों के लिए 1800 इंजेक्शन की रोज जरूरत होती है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन न मिलने से इलाज प्रभावित हो रहा है।
पश्चिम बंगाल में महिला की मौत
पश्चिम बंगाल में ब्लैक फंगस का एक मरीज है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि अभी पांच मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि ब्लैक फंगस की चपेट में आकर शंपा चक्रवर्ती (32) की शुक्रवार को मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिन पांच मरीजों का इलाज चल रहा है, वो बिहार और झारखंड के हैं।