ओडिशा के कोरापुट में सरकारी शहीद लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 'लापरवाही' के कारण छह मरीजों की मौत हो गई। इस मामले में दो अलग-अलगजांच के आदेश दिए हैं। जहां अस्पताल अधीक्षक सुशांत कुमार साहू ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशक (डीएमईटी) संतोष मिश्रा ने भी आरोपों की अलग से जांच के आदेश दिए हैं।
अस्पताल अधीक्षक सुशांत कुमार साहू ने कहा कि हमने सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई है। मंगलवार रात को जिन मरीजों की मौत हुई, उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि मौत किसी गलत इंजेक्शन के कारण नहीं हुई है, लेकिन फिर भी हम आरोपों की जांच करेंगे। उन्होंने बताया कि पांच मृतक मरीजों में से दो को पेट में चोटें थीं, जबकि एक अन्य के लीवर में छेद था।
उन्होंने कहा कि हमें संदेह है कि उनकी मौत अधिक रक्तस्राव और सेप्टीसीमिया के कारण हुई। वहीं, चौथे मरीज का स्टेज 4 कैंसर का इलाज चल रहा था और पांचवां एक दुर्घटना का शिकार था, जिसे जयपुर से रेफर किया गया था।
वहीं, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशक (डीएमईटी) संतोष मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के तीन और कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के दो डॉक्टरों वाली पांच सदस्यीय टीम आरोपों की जांच करेगी। टीम को गुरुवार तक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
गौरतलब है कि मंगलवार रात को ओडिशा के सरकारी अस्पताल में कुछ ही देर में तीन पुरुषों और तीन महिलाओं की मौत हो गई थी। पांच मरीजों की मौत रात 11 बजे से 12 बजे के बीच हुई, जबकि छठे मरीज ने बुधवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे दम तोड़ दिया। बाद में मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें इंजेक्शन दिया गया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। मृतक व्यक्तियों की पहचान शुक्र माझी, रुकुनी पेंटिया, फूलमती माझी, भागबन परीजा, बती खरा और जगन्नाथ पुजारी के रूप में की गई।
वहीं, विपक्षी बीजद और कांग्रेस ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही विपक्षी दल ने राज्य में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के ध्वस्त होने का आरोप लगाया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों की मौत को हत्या बताते हुए हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता राम चंद्र कदम ने मृतकों के परिवारों के लिए 25-25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की।