पिछले दिनों पंजाब से खबर थी कि वहां आतंकवादियों ने ड्रोन से हथियार गिराए हैं। उधर, सऊदी अरब में भी तेल कंपनी पर ड्रोन से हमले की खबर थी। इन दो घटनाओं ने सुरक्षा एजेसियों को सतर्क कर दिया है। क्योंकि ये ड्रोन आतंकी हमले को अंजाम देने में इस्तेमाल हो सकते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्तमान समय में करीब छह लाख से अधिक अवैध ड्रोन उड़ रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। दरअसल, यह सर्वेक्षण रिपोर्ट केंद्रीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ उद्योग संगठन फिक्की ने दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में करीब छह लाख अपंजीकृत या यूं कहें कि बिना नियमन वाले मानवरहित एयर व्हीकल (यूएवी) उड़ान भर रहे हैं।
हालांकि यह ड्रोन वो हैं जो केंद्र सरकार के नियम बनाने से पहले बाजार में आ चुके थे। अब रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इनका नियमन करना जरूरी है। केंद्रीय एजेंसियां एंटी ड्रोन तकनीक, स्काइ फेंस, ड्रोन गन, कैचर और स्काइवॉल-100 जैसी सुविधाओं पर काम कर रही हैं।
केंद्र सरकार ने भी ड्रोन नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वहीं दूसरी तरफ देश में ड्रोन की मांग साल दर साल बढ़ती जा रही है। फिक्की की रिपोर्ट यह भी कहती है कि साल 2020 तक घरेलू बाजार में ड्रोन का कारोबार करीब सात अरब रुपए (700 करोड़ रुपए) से ज्यादा का होने की संभावना है।