एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इन्सान के शरीर में छह जीन की पहचान की है। यह जीन भावनात्मक प्रतिक्रिया और अर्थ बोध के केंद्र में होते हैं जो व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। इन जीनों को अत्यधिक संरक्षित पाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जब अध्ययन में व्यक्तित्व किसी व्यक्ति की जीन अभिव्यक्ति को काबू करने के साक्ष्यों की तलाश हुई तब पता चला कि जीन अभिव्यक्ति किसी व्यक्ति के अस्तित्व के मूल स्तर पर होती है जहां ये लक्षणों और व्यवहार में बदल जाते हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह निष्कर्ष मन और शरीर के बीच लंबे समय से चले आ रहे रहस्य पर नई रोशनी डालते हैं। स्पेन के ग्रेनेडा विश्वविद्यालय के नेतृत्व में आनुवंशिकी और मनोविज्ञान विशेषज्ञों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने फिनलैंड में 459 वयस्कों पर यह अध्ययन किया है। डाटा का विश्लेषण करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करते हुए शोधकर्ताओं ने जीन की अभिव्यक्ति और उसकी बनावट के बारे में दो प्रमुख खोज की। ब्यूरो
4,000 जीन का नेटवर्क
मॉलिक्यूलर साइकियाट्री पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क में चार हजार जीन के एक नेटवर्क की खोज की है। इनमें से कुछ को पहले मानव व्यक्तित्व की विरासत से जोड़ा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ये जीन कई मॉड्यूल में समूहीकृत हैं, जो जीन अभिव्यक्ति को विनियमित करने और किसी व्यक्ति को अनुकूलित करने में मदद कर सकते हैं।
नियंत्रण केंद्र से होता है समन्वय
यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा की प्रो. एलिसा डियाज डे ला ने कहा, भावना और अर्थ के इस नेटवर्क को छह जीनों से बने एक नियंत्रण केंद्र द्वारा समन्वित किया जाता है। हमने पाया कि नियंत्रण केंद्र के छह जीन एकल-कोशिका वाले जीवों से लेकर आधुनिक मनुष्यों तक के विकास के दौरान अत्यधिक संरक्षित हैं। यह खोज पृथ्वी पर जीवन के सभी रूपों के कामकाज को विनियमित करने में उनकी लाभकारी भूमिका की पुष्टि करती है।