इंसेफेलाइटिस से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मेडिकल कॉलेज में 48 घंटो के भीतर छह मरीजों की मौत हो गई। वहीं 20 नए मरीजों को भर्ती किया गया है। जनवरी से अब तक 194 मरीज इस बीमारी से जान गवां चुके हैं।
इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज को लेकर शासन से लेकर प्रशासन तक मुस्तैदी दिखाते हैं, लेकिन ईटीसी (इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर) पर इलाज न हो पाने से मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यही वजह है कि इससे होने वाली मौतों को नियंत्रित करने में दिक्कतें आ रही हैं। एक के बाद एक मौतों से अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठना लगा है।
मरने वालों में देवरिया की निशा (16) पुत्र प्रमोद, महराजगंज की निशा गौड़ (2.5) पुत्री धनेश, देवरिया की अंकिता (2) पुत्री रामप्रवेश, कुशीनगर की देवती देवी (40), आफताब, कुशीनगर के मुकेश (9) की मौत हो गई। गोरखपुर के सात, कुशीनगर के दो, महराजगंज, देवरिया, बिहार, मऊ के एक-एक मरीज भर्ती किए गए। जनवरी से लेकर अब तक 742 मरीजों का इलाज हो चुका है। वहीं 194 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज के नेहरु चिकित्सालय के विभिन्न वार्ड में 89 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।