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'फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं': ईसी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब, कहा- एसआईआर पर फैसले सर्वसम्मति से

Mon, 26 Oct 2026 08:46 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं वाला जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने अनियमितताओं के आरोप खारिज किए और कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव नहीं हुआ। विपक्ष ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों के ऑडिट और बूथवार सूची की मांग की है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि आयोग ने क्या जवाब दाखिल किया है...
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद तेज हो गया है। चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं वाला जवाबी हलफनामा दाखिल कर अपनी प्रक्रिया और फैसलों का बचाव किया। आयोग ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करते हुए याचिका के आधार पर भी सवाल उठाए। आयोग का कहना है कि याचिका एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने इस हलफनामे को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।

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क्या है यह पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं की याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और बूथवार सूची उपलब्ध कराने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि किसी योग्य मतदाता का नाम बिना सूचना दिए और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना नहीं हटाया जाना चाहिए। आयोग ने अपने जवाब में निर्णय लेने की प्रक्रिया, फॉर्म-6, मतदाता सूची और डिजिटल डेटाबेस को लेकर उठाए गए सवालों पर सफाई दी है।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में किन 15 बिंदुओं पर जवाब दिया?

चुनाव आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर 15 प्रमुख बातें रखीं।

  • हलफनामे को सर्वसम्मति से मंजूरी... मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने जवाबी हलफनामे को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
  • एसआईआर के तीनों आदेश सर्वसम्मति से पारित... आयोग ने कहा कि जून 2025, अक्तूबर 2025 और मई 2026 में एसआईआर को लेकर जारी तीनों आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे।
  • फाइलों पर टिप्पणियां अंतिम फैसला नहीं... आयोग के अनुसार, किसी फाइल पर मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त की ओर से लिखे गए सवाल, सुझाव या टिप्पणियों को आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।
  • फाइल मंजूरी की प्रक्रिया... सामान्य तौर पर फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और उसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। तत्काल मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जा सकती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज किया जाता है।
  • अधिकारों से बाहर आदेश देने पर कार्रवाई... आयोग ने कहा कि अगर कोई अधिकारी उसे सौंपे गए अधिकारों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
  • 28 जुलाई के कार्य आवंटन आदेश पर सफाई... आयोग ने बताया कि 28 जुलाई का कार्य आवंटन आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। आयोग के संयुक्त निर्देश के बाद 30 जुलाई को यह आदेश लागू नहीं किया गया।
  • फॉर्म-6 में बदलाव नहीं हुआ... आयोग ने कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, इसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
  • एसआईआर का घोषणा पत्र अलग दस्तावेज... आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के लिए इस्तेमाल होने वाला घोषणा पत्र फॉर्म-6 से अलग है। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन में इसे दिखाने के तरीके से फॉर्म में बदलाव होने का भ्रम पैदा हो सकता था।
  • ऑनलाइन आवेदन में बदलाव... आयोग ने कहा कि 21 अक्तूबर से ऑनलाइन आवेदन को फॉर्म-6 और घोषणा पत्र के रूप में अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था की जाएगी, जैसा कागजी फॉर्म में होता है।
  • रिकॉर्ड नहीं मिलने वाले मतदाताओं की सुनवाई... आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड पुराने दस्तावेजों से नहीं जुड़ पाया है, उन्हें सामान्य तौर पर सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। बूथ स्तर के अधिकारी उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। विशेष मामलों में सुनवाई होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन व्यवस्था अपनाई जाएगी।
  • ईसीआईनेट पर नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार... आयोग ने कहा कि ईसीआईनेट पर किसी मतदाता का नाम केवल निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के आदेश से जोड़ा या हटाया जा सकता है। इस व्यवस्था की जांच के लिए आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों वाली समिति बनाई गई है।
  • गोवा में 97 मतदाताओं का मामला... आयोग के अनुसार, सूची से छूटे बताए गए 97 लोगों में से 88 पहले से मतदाता के रूप में दर्ज थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे।
  • पश्चिम बंगाल की अपीलों पर सफाई... आयोग ने कहा कि मतदाताओं को सूची में शामिल करने से संबंधित अपीलें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकारियों ने दाखिल की थीं। आयोग के मुताबिक, ये मामले उसके सामने नहीं लाए गए थे।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर जवाब... आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रोक लगाने की मांग वाली याचिका को कानूनी रूप से विचार योग्य नहीं बताया। आयोग के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है।
  • मीडिया को आंतरिक दस्तावेज जारी करने से इनकार... आयोग ने कहा कि उसने किसी भी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया के लिए जारी करने की मंजूरी नहीं दी। उसने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
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