पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में चलाए गए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) अभियान ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनावी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। इस अभियान का सबसे गहरा असर उन मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों और खासकर दो प्रमुख जिलों- उत्तर और दक्षिण 24 परगना पर पड़ा है, जो टीएमसी के पारंपरिक गढ़ माने जाते हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी अब अधिक मतदान, बंगाली अस्मिता और महिला व अल्पसंख्यक मतदाताओं के एकजुट होने पर भरोसा कर रही है, ताकि इस प्रभाव को कम किया जा सके।
SIR का प्रभाव और TMC के गढ़ पर असर
यह मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान विशेष रूप से उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में सबसे अधिक प्रभावी रहा है। ये छह जिले मिलकर 100 से अधिक विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें से अकेले दो 24 परगना जिलों में 64 सीटें हैं। इन क्षेत्रों को पश्चिम बंगाल में किसी भी विजयी गठबंधन की रीढ़ माना जाता है।
2011 से ही ये जिले टीएमसी के प्रभुत्व का केंद्र रहे हैं, और 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने इन सभी छह जिलों में क्लीन स्वीप किया था।
- मुर्शिदाबाद जिले में 11 लाख से अधिक मतदाता फिलहाल जांच के दायरे में हैं, जो राज्य में सबसे अधिक है।
- मालदा में लगभग 8.3 लाख मतदाता ऐसे ही हैं।
- राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर 24 परगना में लगभग 5.9 लाख मतदाता जांच के अधीन हैं।
- दक्षिण 24 परगना में लगभग 5.2 लाख ऐसे मामले हैं।
- इन जिलों में लगभग 23 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए भी गए हैं।
टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि उत्तर और दक्षिण 24 परगना पर नियंत्रण अक्सर बंगाल पर शासन करने वाले को तय करता है। यदि इन पांच जिलों में पार्टी की सीटें घटती हैं, तो यह एक बड़ी चुनौती होगी।
मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के परिणामस्वरूप कुल 63.66 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इसके कारण मतदाता आधार 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गया है। इसके अतिरिक्त, 60.06 लाख मतदाता अभी भी अपनी कागजात की जांच की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुल मिलाकर एसआईआर के बाद की सूची दर्शाती है कि लगभग 1.23 करोड़ मतदाता यानी लगभग हर छठा मतदाता या तो सूची से हटा दिया गया है या जांच के अधीन है।
चुनावी समीकरणों में संभावित बदलाव
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एसआईआर, नामों को हटाए जाने और जांच के दायरे में आए मतदाताओं की संख्या 200 से अधिक सीटों पर 2024 के लोकसभा चुनावों के जीत के अंतर से अधिक है। यह इंगित करता है कि यह अभियान राज्य के आगामी चुनावों में चुनावी समीकरणों को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है।
- कम से कम 120 विधानसभा क्षेत्रों में अकेले हटाए गए मतदाताओं की संख्या उन निर्वाचन क्षेत्रों में 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत के अंतर से अधिक है।
- इसी तरह 2021 के विधानसभा चुनावों में कई कम जीत मार्जिन वाले कम से कम 40 सीटों पर नामों को हटाए जाने का पैमाना जीत के अंतर को पार कर गया है, जिनमें से अधिकांश सीटें भाजपा ने जीती थीं और बाकी TMC ने।
- पिछले विधानसभा चुनावों में TMC ने 10,000 से कम वोटों के अंतर से कम से कम 45 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने लगभग 20 निर्वाचन क्षेत्रों में इसी तरह के अंतर से जीत हासिल की थी। यह दर्शाता है कि वोटों में छोटे से छोटे बदलाव भी कई करीबी मुकाबलों के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
टीएमसी सूत्रों और शोधकर्ताओं के अनुसार 41 ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में जहां अल्पसंख्यक आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, नामों को हटाए जाने की दर 5.61 प्रतिशत कम थी, लेकिन जांच के दायरे में आए मतदाताओं का प्रतिशत बढ़कर 21 प्रतिशत से अधिक हो गया। 2024 के लोकसभा चुनावों में TMC इन सीटों में से 29 पर आगे थी, कांग्रेस-वाम गठबंधन 11 पर और भाजपा केवल एक पर।
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भाजपा का दृष्टिकोण और टीएमसी का आरोप
भाजपा ने एसआईआर अभियान को मतदाता सूची को साफ करने और अवैध प्रवासियों, विशेषकर बांग्लादेश से आने वालों की पहचान करने के एक लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया है। हालांकि TMC का तर्क है कि यह प्रक्रिया उन जिलों को असंगत रूप से प्रभावित कर रही है, जहां पार्टी ने पिछले चुनावों में मजबूत प्रदर्शन किया था।
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि नामों को हटाए जाने का पैमाना भाजपा नेताओं के उन दावों को दर्शाता है कि 1.2 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए जाएंगे। साथ ही आरोप लगाया कि यह अभियान 'राजनीतिक रूप से प्रेरित और पूर्व-निर्धारित' था।
राजनीतिक विश्लेषक सुमन भट्टाचार्य का कहना है कि मतदाता नामों को हटाए जाने के सांख्यिकीय निहितार्थ जटिल हैं। उनका मानना है कि यदि नाम आनुपातिक रूप से हटाए जाते हैं, तो एक निर्वाचन क्षेत्र में अधिक वोट हिस्सेदारी वाली पार्टी को संख्यात्मक रूप से अधिक मतदाता खो सकते हैं। टीएमसी इस विवाद को भावनात्मक लाभ में बदलने का प्रयास कर सकती है।
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TMC की नई रणनीति: मतदान प्रतिशत बढ़ाना और ध्रुवीकरण
टीएमसी के राज्य उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा है कि पार्टी का लक्ष्य मतदान प्रतिशत बढ़ाना और सेक्टर-वार मतदान सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि यदि मतदान बढ़ता है और यदि महिला व मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में वोट करते हैं, साथ में युवा वर्ग का भी समर्थन मिलता है, तो हटाए गए नामों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। पार्टी इस मुद्दे को पहचान और नागरिकता के प्रश्न के रूप में भी पेश करने की कोशिश कर रही है। यह तर्क देते हुए कि कई मतदाता बार-बार दस्तावेज सत्यापन और सुनवाई से परेशान महसूस कर रहे हैं। कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि यदि हटाए गए मतदाताओं में से एक महत्वपूर्ण संख्या को अंततः बहाल कर दिया जाता है, तो यह 'प्रतिशोध मतदान' को जन्म दे सकता है।
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