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SIR: मतदाता सूची पर भाजपा-कांग्रेस की समस्या एक, तो समाधान क्या है?

सार

राहुल गांधी के बाद भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने उन्हीं के अंदाज में प्रजेंटेशन देकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली से लेकर अमेठी तक, अखिलेश यादव और डिंपल यादव के लोकसभा क्षेत्रों से लेकर अभिषेक बनर्जी तक के लोकसभा क्षेत्रों तक में मतदाता सूची में लाखों की संख्या में 'संदेहास्पद' वोटर पाए गए हैं।
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राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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मतदाता पहचान पत्र को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों के आरोप समान हैं। दोनों ही दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी है और फर्जी मतदाताओं के सहारे चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश हुई है। पहले राहुल गांधी ने एक मजबूत प्रजेंटेशन देकर यह साबित करने की कोशिश की थी कि लोकसभा चुनाव 2024 में भारी गड़बड़ी हुई थी। उनके अनुसार इस गड़बड़ी के सहारे ही भाजपा 2024 में सत्ता में आ सकी। 
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अब भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने उन्हीं के अंदाज में प्रजेंटेशन देकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली से लेकर अमेठी तक, अखिलेश यादव और डिंपल यादव के लोकसभा क्षेत्रों से लेकर अभिषेक बनर्जी तक के लोकसभा क्षेत्रों तक में मतदाता सूची में लाखों की संख्या में 'संदेहास्पद' वोटर पाए गए हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि विपक्ष के इन नेताओं की जीत का अंतर इनके लोकसभा क्षेत्र में दर्ज संदेहास्पद मतदाताओं की संख्या से बहुत कम है। 

बड़ा प्रश्न यही है कि जब मतदाता सूची को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी दलों के आरोप एक जैसे हैं तो इसका समाधान क्या है? लोकतंत्र में जनता के भरोसे के सबसे बड़ा आधार चुनाव है, और इस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए दोषरहित मतदाता सूची सबसे पहली प्राथमिकता है। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों, रोहिंग्याओं के मतदाता सूची में शामिल होने की घटनाओं को देखते हुए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय भी बन गया है। 
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ऐसे में एक निष्पक्ष, शुद्ध और दोषरहित मतदाता सूची बनाने का रास्ता क्या हो सकता है? 

बायोमेट्रिक पहचान समस्या का समाधान
तकनीक फर्जी मतदाताओं को चुनाव से दूर रखने का सबसे कारगर उपाय हो सकती है। डिजिटलीकरण ने देश के अनेक विभागों-कार्यों में व्याप्त बड़े भ्रष्टाचार को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई है। अब इसका मतदाता सूची का दोष समाप्त करने के लिए बेहतर तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए। बायोमेट्रिक पहचान के आधार पर बनने वाले आधार (AADHAR) पहचान पत्र से कई तरह की समस्याएं समाप्त करने की कोशिशें सफल हुई हैं। 

इस समय देश में 80 करोड़ लोगों को बायोमेट्रिक पहचान के आधार पर राशन का वितरण किया जा रहा है। इस सिस्टम की विशेषता है कि कोई भी व्यक्ति पूरे देश में कहीं से भी अपने कोटे का राशन प्राप्त कर सकता है, लेकिन उसके अधिकार को कोई दूसरा नहीं ले सकता क्योंकि उसकी बायोमेट्रिक पहचान किसी दूसरे के द्वारा करना संभव नहीं है। कोई व्यक्ति चाहकर भी एक सीमित अवधि में दूसरी बार राशन नहीं ले सकता। आवश्यकता है कि इसी प्रकार का फुलप्रूफ सिस्टम अब मतदाता सूची को तैयार करने में और मतदान के समय पूरी डिजिटल रिकॉर्डिंग करके समस्या का समाधान किया जाए।  

लाखों चेहरों में से एक व्यक्ति की पहचान संभव
आर्टिफिशियल तकनीकी ने कई मुश्किल कार्यों को आसान कर दिया है। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान यूपी सरकार ने ऐसी तकनीक का  इस्तेमाल किया था जिससे करोड़ों लोगों की गणना की जा सकी। उच्च तकनीकी के कैमरों से अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज गति से चलते हुए सभी वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर पता करना संभव है।  देश के सभी अपराधियों के डाटाबेस रखने के बाद अब पुलिस लाखों अपराधियों में से किसी एक की सटीक पहचान कर सकती है। 

आज हमारे पास ऐसी तकनीक है कि यदि उनका समुचित उपयोग किया जाए तो कोई एक व्यक्ति एक ही चुनाव में दूसरी बार मतदान नहीं कर सकता। ऐसा करने की कोशिश में वह तुरंत सुरक्षा अधिकारियों की पकड़ में आ सकता है। लेकिन ऐसा निष्पक्ष चुनावी सिस्टम बनाने के लिए सरकार से लेकर विपक्ष तक सबका एक मंच पर आना आवश्यक है। फिलहाल यही काम सबसे मुश्किल लग रहा है और चुनाव सुधार में यही सबसे बड़ी बाधा है।    
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