कर्नाटक और गोवा के बीच चल रहा जल विवाद तेज होता जा रहा है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया।
दरअसल दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और केंद्र के सामने किसी एक राज्य का पक्ष न लेते हुए दिखने की समस्या है। गोवा में भाजपा सरकार के पास मात्र सात विधायकों का बहुमत है वहीं कर्नाटक में 5 दिसंबर को होने वाले 14 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा को अपनी सरकार बचाए रखने के लिए 11 सीटें जीतना जरूरी है।
ऐसे में न तो वह कर्नाटक का पक्ष लेकर गोवा के विधायकों को नाराज कर सकती है और ना ही गोवा का पक्ष लेते हुए दिखकर कर्नाटक में बहुमत खोने का खतरा उठाने की स्थिति में है।
यह है मामला
दरअसल कर्नाटक के 14 उपचुनाव में से अधिकतर उत्तर कर्नाटक में हो रहे है जहां की कलाशा और भांडूरा नदियों पर बांध बनाने की पर्यावरणीय अनुमति देने से गोवा में हंगामा मच गया है। यदि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इस इजाजत खारिज कर देता है तो कर्नाटक के लोग नाराज हो जाएंगे। और यदि बांध बनता है तो इन नदियों का पानी गोवा में कम आएगा और यहां की मुख्य नदी महादेई (मांडवी) में पानी की कमी हो जाएगी। इसी बात को लेकर दोनों राज्यों में आंदोलन हो रहे हैं।
यह निकाला रास्ता
जावड़ेकर ने फिलहाल इस मामले को सुलझाने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक कमेटी बनाने का ऐलान किया है। हालांकि यह कमेटी कब तक बनेगी और कब तक रिपोर्ट देगी इसके लिए कोई समय सीमा नहीं तय की गई है। भाजपा का मानना है इस तरह फिलहाल दोनों राज्यों में बढ़ रहे आंदोलन को शांत किया जा सकता है।