भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार की नई तकनीक (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पेट में बार-बार दर्द, दस्त या दूसरी परेशानी होने पर उसकी वजह जानने के लिए कई बार अलग-अलग जांच करानी पड़ती है। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक तैयार की है, जिससे पेट की तीन तरह की बीमारियों का पता एक साथ लगाया जा सकता है। इनमें अमीबिक पेचिश, जिआर्डिया से होने वाला संक्रमण और क्रिप्टोस्पोरिडियम से होने वाले दस्त शामिल हैं।
हर तरीके से फायदा... किफायती के साथ समय की भी बचत
इससे जांच का खर्च करीब आधा और समय भी पहले के मुकाबले एक-तिहाई रह जाएगा। यानी जिस जांच में पहले करीब साढ़े चार घंटे लगते थे, वह अब करीब डेढ़ घंटे में पूरी हो सकती है। यह अध्ययन चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के वैज्ञानिकों ने किया है।
अलग-अलग जांच कराने में कितना खर्च
इसके नतीजे साइंटिफिक रिपोर्ट्स पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। तीनों संक्रमण की अलग-अलग जांच कराने में करीब 1,800 रुपये खर्च होते हैं। नई तकनीक में तीनों की जांच एक साथ करने पर यह खर्च करीब 900 रुपये रह गया।
आंतों को प्रभावित करते हैं संक्रमण
वैज्ञानिकों ने पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियों वाले 540 मरीजों के नमूनों की जांच की। नई तकनीक से करीब 24 फीसदी नमूनों में इन तीन संक्रमणों में से किसी के होने के संकेत मिले। जांच के लिए मरीज का मल लिया जाता है। ये संक्रमण आंतों को प्रभावित करते हैं और दस्त, पेट दर्द जैसी परेशानियों की वजह बनते हैं।
कैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है?
अमीबिक पेचिश में दस्त के साथ पेट दर्द और कभी-कभी मल में खून भी आता है। जिआर्डिया संक्रमण से दस्त, पेट फूलने और पाचन संबंधी दिक्कतें होती हैं।