सिक्किम के स्वास्थ्य मंत्री मणि कुमार शर्मा ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका आरोप है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी की बाद की स्थिति को ठीक से नहीं संभाल पाई है, जिसमें उसने कहा था कि सिक्किमी नेपाली समुदाय अप्रवासी हैं।
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग को लिखे पत्र में शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने सिक्किम के लोगों की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया है। उन्होंने तमांग से तत्काल प्रभाव से इस्तीफे को स्वीकार करने का आग्रह किया। शर्मा ने कहा, मुझे लगता है कि आगे राज्य मंत्रिमंडल में बने रहना जरूरी नहीं है।
हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी, 2023 के अपने आदेश में केंद्र सरकार को आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10 (26AAA) में 'सिक्किम' की परिभाषा में संशोधन करने का निर्देश दिया था, जिसमें 26 अप्रैल, 1975 की विलय की तारीख को या उससे पहले सिक्किम में अधिवासित सभी भारतीय नागरिकों को आयकर में छूट दी गई थी।
शीर्ष कोर्ट यह टिप्पणी एसोसिएशन ऑफ ओल्ड सेटलर्स ऑफ सिक्किम की उस याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए की जिसमें 26 अप्रैल, 1975 को भारत में विलय से पहले राज्य में बसे लोगों को आयकर में छूट देने की मांग की गई थी।
सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने भी शीर्ष कोर्ट की टिप्पणियों के विरोध में शांति मार्च निकाला। मुख्यमंत्री तमांग ने राज्य सरकार की ओर से यह आश्वासन देकर नाराज स्थानीय लोगों की भावनाओं को शांत करने की कोशिश की कि जल्द ही शीर्ष अदालत में एक समीक्षा याचिका दायर की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार ने सिक्किमी नेपाली समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए पहले ही फैसला कल लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू से बात कर चुके हैं। जिन्होंने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार सिक्किम सरकार की पुनर्विचार याचिका का समर्थन करेगी, और अगर जरूरी होगा तो खुद भी पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।
सीएम तमांग ने सभी लोगों से धैर्य रखने और न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल समय की बात है कि इस मुद्दे को सभी की भलाई के लिए संबोधित किया जाएगा।