पार्टी को मिला था पूर्ण बहुमत
तमांग की पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने अप्रैल में हुए चुनावों में राज्य विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल किया था। इसके बाद 27 अप्रैल को तमांग ने मुख्यमंत्री पद पर शपथ ग्रहण की थी। लेकिन वह प्रतिबंध के कारण विधानसभा चुनावों में नहीं उतर पाए थे, जबकि निर्वाचन कानून के तहत पद पर शपथ ग्रहण के छह महीने के अंदर विधानसभा की सदस्यता ग्रहण करना अनिवार्य होता है। चुनाव आयोग की तरफ से सजा घटा दिए जाने के बाद उनका प्रतिबंध 10 सितंबर को खत्म हो गया है। इसके चलते अब वह चुनाव जीतकर अपना पद बचा सकते हैं।
गो वितरण योजना में भ्रष्टाचार के थे दोषी
तमांग को 1990 में पशुपालन मंत्री रहने के दौरान गो वितरण योजना के सरकारी फंड में गड़बड़ी करने का दोषी पाया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ 2003 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उन्होंने इस मामले में अदालत से मिली जेल की सजा भी काटी है।
पहले भी उठाए हैं आयोग ने ऐसे कदम
किसी पर लगे चुनावी प्रतिबंध को घटाने का कदम चुनाव आयोग ने पहली बार नहीं उठाया है। दो ऐसे मामलों का आयोग ने तमांग के लिए किए गए आदेश में जिक्र भी किया है। एक बार आयोग ने श्याम नारायण तिवारी के मामले में ऐसा किया था, जबकि तिवारी को मौत की सजा मिली हुई थी। दूसरी बार आयोग ने पूर्वी यूपी के बाहुबली नेता मित्रसेन यादव के मामले में चुनाव लड़ने की इजाजत दी थी, जबकि यादव को हत्या के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था।