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सीरम संस्थान का पीएमओ को पत्र, औषधि नियामक की व्यवस्था में सुधार आए तो बेहतर

Thu, 04 Mar 2021 10:11 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
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सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला - फोटो : एएनआई (फाइल)
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दुनिया में सर्वाधिक संख्या में टीका बनाने वाले पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ((एसआईआई) ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर वर्तमान औषधि नियामक व्यवस्था में सुधार का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत क्लीनिकल परीक्षण के दौरान गैर कोविड-19 टीकों के निर्माण और भंडारण की अनुमति देना भी शामिल है।

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एसआईआई में सरकार व नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने यह पत्र लिखा। इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय के 18 मई 2020 के गजट अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि इसमें क्लीनिकल परीक्षण के तहत कोविड-19 के टीके के निर्माण व भंडारण की अनुमति दी गई है ताकि उनकी बिक्री व वितरण किया जा सके।

दो मार्च को लिखे गए इस पत्र में प्रकाश कुमार सिंह ने कहा, 'इस नियम के कारण यह हमारे लिए संभव हो गया कि क्लीनिकल परीक्षण के दौरान कोविड-19 टीके का निर्माण और भंडारण कर सकें और इसी के कारण हम लाखों लोगों की जिंदगी बचाने के लिए इतने कम समय में हम एक वैक्सीन उपलब्ध करा पाए।'
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एसआईआई ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविड-19 टीके 'कोविशील्ड; की करीब पांच करोड़ खुराकें 2020 के अंत तक तैयार कर ली थीं। जबकि देश में टीके के आपात इस्तेमाल के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहा था। उसे इस वर्ष जनवरी में इसकी अनुमति मिली।

सिंह ने कहा, 'कोविड-19 टीके के प्रावधान के सफल परिणाम को देखते हुए इसे गैर कोविड-टीके पर भी लागू किया जाना चाहिए।' पीएमओ को लिखे पत्र में उन्होंने कोविड और गैर कोविड टीकों की बची हुई खुराकों के व्यावसायिक उद्देश्य से इस्तेमाल की अनुमति मांगी, जिनका इस्तेमाल क्लीनिकल परीक्षण में किया गया है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 अप्रैल 2018 को मसौदा नियम जारी कर क्लीनिकल परीक्षण में इस्तेमाल टीकों में बची हुई खुराक का व्यावसायिक इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। सिंह ने कहा, 'इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। जीवनरक्षक टीके बर्बाद होने से बचाने के लिए इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।'

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