ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की एक तस्वीर इन दिनों चर्चा में है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाथ पकड़े नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं की यह तस्वीर वायरल हुई तो कैमरे की नजर उनके पीछे खड़े एक युवा भारतीय अधिकारी पर भी गई। दुनिया के तीन बड़े नेताओं के बीच खड़े इस अधिकारी का नाम सिद्धार्थ बाबू है। वे भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस के 36 वर्षीय अधिकारी हैं और इस समय विदेश मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
तीन बड़े नेताओं के बीच खड़े सिद्धार्थ बाबू की क्या थी जिम्मेदारी?
सिद्धार्थ बाबू 2017 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं। वे अभी विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया प्रभाग में उप सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत में मदद कर रहे थे। सिद्धार्थ बाबू चीनी भाषा जानते हैं और बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को शी जिनपिंग की बात समझने में मदद कर रहे थे। यही वजह थी कि वे इस महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान तीनों नेताओं के पीछे खड़े दिखाई दिए।
सिद्धार्थ बाबू कहां के रहने वाले हैं और उन्होंने क्या पढ़ाई की?
- सिद्धार्थ बाबू मूल रूप से केरल के कोच्चि के रहने वाले हैं। उन्होंने 2012 में मार अथानासियस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
- पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ई-कॉमर्स क्षेत्र में काम किया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
- पहली कोशिश में वे परीक्षा पास नहीं कर सके। हालांकि, दूसरी कोशिश में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल की और भारतीय विदेश सेवा को चुना।
चीन में चार साल की पोस्टिंग ने सिद्धार्थ बाबू को कैसे तैयार किया?
सिद्धार्थ बाबू ने दिसंबर 2017 में नई दिल्ली में अधिकारी प्रशिक्षु के तौर पर अपना राजनयिक करियर शुरू किया। उनकी पहली विदेश पोस्टिंग चीन की राजधानी बीजिंग में हुई। 2018 से 2022 के बीच उन्होंने वहां पहले थर्ड सेक्रेटरी और फिर सेकंड सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। बीजिंग में चार साल की इस पोस्टिंग के दौरान उन्होंने चीनी भाषा पर अपनी पकड़ मजबूत की। साथ ही चीन से जुड़े मामलों को समझने और वहां काम करने का अनुभव भी हासिल किया। आगे चलकर यही अनुभव विदेश मंत्रालय में उनकी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा बना।
अमेरिका में क्या जिम्मेदारी निभा चुके हैं सिद्धार्थ बाबू?
- बीजिंग में काम करने के बाद सिद्धार्थ बाबू अगस्त 2022 से जून 2024 तक कैलिफोर्निया में कांसुल के तौर पर तैनात रहे।
- इसी दौरान उन्होंने मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज एट मॉन्टेरी से भाषा की व्याख्या और अनुवाद में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की।
- 2024 में वे नई दिल्ली लौटे और अंडर सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। इसके बाद जनवरी 2025 में उन्होंने विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया प्रभाग में उप सचिव की जिम्मेदारी संभाली।
क्या सिद्धार्थ बाबू पहले भी पीएम मोदी की बातचीत में मदद कर चुके हैं?
ब्रिक्स की वायरल तस्वीर में सिद्धार्थ बाबू का नजर आना पहली बार नहीं है। इससे पहले भी वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान व्याख्या करते दिखाई दे चुके हैं। जनवरी में भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वे वीआईपी मंच पर तैनात थे। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई बातचीत की व्याख्या की थी। इससे पता चलता है कि उच्चस्तरीय बैठकों में भाषा से जुड़ी जिम्मेदारी निभाने में उनका अनुभव पहले से रहा है।
वायरल तस्वीर ने पर्दे के पीछे काम करने वाले अफसरों को कैसे दिखाया?
- ब्रिक्स की तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग के बीच का हल्का पल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। लेकिन इसी तस्वीर ने उन अधिकारियों की भूमिका भी सामने ला दी, जो बड़े नेताओं की बैठकों के दौरान पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं।
- सिद्धार्थ बाबू की जिम्मेदारी ऐसी ही है। अलग-अलग भाषाओं में होने वाली बातचीत को समझने और संवाद को सहज बनाने में ऐसे अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
- वायरल तस्वीर ने आम लोगों को यह देखने का मौका दिया कि बड़े राजनयिक संवाद के पीछे अधिकारी किस तरह काम करते हैं।
इंजीनियर से राजनयिक बनने तक सिद्धार्थ बाबू की कहानी क्या है?
सिद्धार्थ बाबू की कहानी इंजीनियरिंग की पढ़ाई से शुरू होकर भारतीय विदेश सेवा और फिर दुनिया के बड़े नेताओं की बातचीत तक पहुंचती है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, ई-कॉमर्स क्षेत्र में काम किया और इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरी कोशिश में 15वीं रैंक हासिल कर उन्होंने आईएफएस चुना। चीन में चार साल की पोस्टिंग, चीनी भाषा का ज्ञान और अनुवाद की पढ़ाई ने उनके अनुभव को और मजबूत किया। अब ब्रिक्स की वायरल तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी के पीछे उनकी मौजूदगी ने उन्हें चर्चा में ला दिया है।