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सिद्धिविनायक मंदिर में ड्रेस कोड: भारत ही नहीं, स्पेन-इटली तक पूजास्थलों में जाने के हैं नियम, जानें कहां-क्या

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 30 Jan 2025 01:37 PM IST

सार

सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर प्रशासन की तरफ से कौन से नियम लागू किए गए हैं? मंदिर की नई गाइडलाइंस की तुलना उत्तर भारत के मंदिरों से क्यों हो रही है? देश में कहां-कहां पहले ही इस तरह के नियम लागू हैं? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहां पूजाघरों में एंट्री के लिए नियम लागू हैं? आइये जानते हैं...
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India and World Temples. - फोटो : अमर उजाला
मुंबई के लोकप्रिय सिद्धिविनायक मंदिर में अब भक्तों के पहुंचने से जुड़े नए नियम लागू हो गए हैं। इनके मुताबिक, अब मंदिर आने वाले भक्तों को भारतीय परिधान पहनने की सलाह दी गई है। मंदिर प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा कि भक्तों को शाली और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने होंगे। मंदिर की तरफ से जारी इन निर्देशों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का दौर जारी है। कई लोगों ने इन नियमों की तुलना उत्तर भारत के मंदिरों में जारी सख्त दिशा-निर्देशों से भी की है। वहीं, कुछ और लोगों ने विदेश में मौजूद पूजास्थलों का हवाला देते हुए इन नियमों पर टिप्पणी की है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर प्रशासन की तरफ से कौन से नियम लागू किए गए हैं? मंदिर की नई गाइडलाइंस की तुलना उत्तर भारत के मंदिरों से क्यों हो रही है? देश में कहां-कहां पहले ही इस तरह के नियम लागू हैं? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहां पूजाघरों में एंट्री के लिए नियम लागू हैं? आइये जानते हैं...
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India and World Temples. - फोटो : अमर उजाला
मुंबई के लोकप्रिय सिद्धिविनायक मंदिर में अब भक्तों के पहुंचने से जुड़े नए नियम लागू हो गए हैं। इनके मुताबिक, अब मंदिर आने वाले भक्तों को भारतीय परिधान पहनने की सलाह दी गई है। मंदिर प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा कि भक्तों को शाली और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने होंगे। मंदिर की तरफ से जारी इन निर्देशों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का दौर जारी है। कई लोगों ने इन नियमों की तुलना उत्तर भारत के मंदिरों में जारी सख्त दिशा-निर्देशों से भी की है। वहीं, कुछ और लोगों ने विदेश में मौजूद पूजास्थलों का हवाला देते हुए इन नियमों पर टिप्पणी की है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर प्रशासन की तरफ से कौन से नियम लागू किए गए हैं? मंदिर की नई गाइडलाइंस की तुलना उत्तर भारत के मंदिरों से क्यों हो रही है? देश में कहां-कहां पहले ही इस तरह के नियम लागू हैं? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहां पूजाघरों में एंट्री के लिए नियम लागू हैं? आइये जानते हैं...

क्या हैं श्री सिद्धिविनायक ट्रस्ट की गाइडलाइंस?
  • श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, आने वाले लोगों को भारतीय परिधान पहनने की सलाह दी गई है। 
  • ट्रस्ट की तरफ अगले हफ्ते से भक्तों को कटे-फटे ट्राउजर, छोटी स्कर्ट या ऐसे कपड़े न पहनकर आने की सलाह दी गई है, जो शरीर के हिस्सों को दिखाते हैं। ऐसे लोगों को मंदिर के प्रभादेवी इलाके में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

ट्रस्ट की तरफ से यह नियम लागू करने की वजह क्या?
  • ट्रस्ट ने यह भी कहा कि मंदिर रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और कई भक्तों ने मंदिर में पूजा के दौरान अनुशासन की कमी और अपमानजनक कपड़ों पर चिंता जताई थी। कई बार अनुरोध करने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने यह ड्रेस कोड लागू करने का फैसला लिया, ताकि मंदिर की पवित्रता बनी रहे। 
  • ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी भक्तों को मंदिर में आने समय सुविधा महसूस हो और मंदिर परिसर की शालीनता बनाई रखी जा सके। 

देश में कहां-कहां लागू हैं ड्रेस कोड से जुड़े ये नियम?

1. बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन
मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर की तरफ से इस तरह के नियम पहले नहीं हैं। इससे पहले दिसंबर 2024 में ही वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भक्तों के आने के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया गया था। इसके तहत ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं से छोटे कपड़े, हाफ पैंट और चमड़े की बेल्ट पहनकर दर्शन न करने की अपील की गई थी। इससे पहले मंदिर में अमर्यादित वस्त्रों को पहनकर आने वाले भक्तों की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके लिए मंदिर प्रबंधन ने बांकेबिहारी मंदिर के प्रवेश मार्गों पर बैनर लगाए हैं।

2. शिवगिरी मठ, केरल
वहीं, केरल के शिवगिरी मठ में भी ड्रेस कोड को लेकर विवाद चला था। दरअसल, यहां मंदिरों में पुरुषों के शरीर के ऊपरी हिस्से पर बिना वस्त्रों के घुसने की अनुमति को लेकर विवाद छिड़ा था। केरल में अधिकतर मंदिरों में यह परंपरा रही है कि यहां पुरुष भक्त बिना शर्ट-टीशर्ट या शरीर के ऊपरी हिस्से पर वस्त्र धारण करे बिना ही एंट्री लेंगे। इसके चलते यहां मंदिरों में लोग शर्ट उतारकर ही मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं। 

हालांकि, इस प्रथा पर विवाद तब शुरू हो गया, जब केरल के श्री नारायण धर्म संघम ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी सच्चिदानंद ने प्रथा को खत्म करने की बात कही थी। उन्होंने इस प्रथा को जातिवाद से जोड़ते हुए इसे पीछे ढकेलने वाला करार दिया था। इस मुद्दे पर केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने भी सच्चिदानंद के प्रस्ताव का समर्थन किया था।

3. उत्तर प्रदेश के और कई मंदिरों में नियम लागू
  • इससे पहले 2023 में उत्तर प्रदेश के कई मंदिरों में ड्रेस कोड को लेकर नियम आ चुके हैं। इनमें मथुरा के बरसाना में स्थित राधा रानी मंदिर शामिल है। यहां लोगों से स्कर्ट, फटी जींस और अभद्र कपड़े न पहनने के निम लागू हैं। 
  • इसके अलावा आगरा के कैलाश मंदिर में महिलाओं से साड़ी या सलवार कुर्ता पहनकर आने की अपील की गई है। जबकि पुरुषों से धोती-कुर्ता और पायजामा पहनकर आने की अपील की गई।
  • अलीगढ़ के गिलहराज हनुमान मंदिर में भी लोगों से ठीक ढंग से कपड़े पहनकर आने की अपील की जा चुकी है। 
  • इसी तरह यूपी के बुलंदशहर में एक मंदिर की तरफ से लोगों को शॉर्ट्स, चिपके हुए कपड़े न पहनकर आने के लिए कहा गया। 

4. उत्तराखंड के मंदिरों में भी भक्तों के लिए नियम
  • दूसरी तरफ उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ समेत कई और मंदिरों में भक्तों के लिए मर्यादित कपड़े पहनकर आने के निर्देश हैं। इनमें कहा गया है कि महानिर्वाणी अखाड़े ने यह कहा है कि यदि स्त्री-पुरुष मंदिरों में आ रहे हैं तो उनका 80 प्रतिशत शरीर ढका होना चाहिए। सभी को मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए।
  • इसके अलावा उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में भी ड्रेस कोड लागू हैं। यहां भक्तों को मंदिर में सिर्फ मर्यादित कपड़े पहनकर आने के ही निर्देश दिए गए हैं। अमर्यादित कपड़े पहनकर आने श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश नहीं दिए जाने की बात भी कही गई है। इसे लेकर मंदिर के अंदर साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं।
  • इससे पहले भी उत्तराखंड के कई मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किया गया है। पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की ओर से हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर और ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया था। कहा गया था कि हाफ पैंट, फटी जींस, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट पहनकर आने वालों को मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। मर्यादित कपड़े पहनकर आने वालों को ही मंदिर में प्रवेश कर दर्शन करने की अनुमति होगी। वहीं, देहरादून के टपकेश्वर मंदिर में भी ड्रेस कोड लागू है। 

मध्य-दक्षिण भारत के मंदिरों में भी कई नियम
  • आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम में पुरुषों को सफेद धोती या कुर्ता पायजामा और महिलाओं को साड़ी या सलवार सूट पहनने की सलाह दी जाती है। 
  • इसके अलावा केरल के गुरुवायुर कृष्ण मंदिर में पुरुषों को लुंगी और महिलाओं को साड़ी या सूट पहनकर ही प्रवेश की अनुमति है।
  • इसके अलावा महाराष्ट्र में भगवान शिव पर आधारित महाबलेश्वर मंदिर में भी भक्तों के जींस, पायजामा, कोट और बरमूडा पहनकर आने पर रोक है। यहां पुरुषों के लिए धोती, जबकि महिलाओं के लिए साड़ी या सूट पहनकर आना अनिवार्य है।
  • संभाजी नगर के दौलताबाद में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों में से एक घृष्णेश्वर महादेव मंदिर में लोगों को पारंपरिक वेशभूषा में एंट्री दी जाती है। 
  • मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकाल मंदिर में भी लोगों के लिए मर्यादापूर्ण वस्त्र पहनने का नियम है। 

दुनिया में कहां-कहां पूजाघरों में लागू हैं ड्रेस कोड?
  • दुनियाभर में कई ऐसे पूजाघर हैं, जहां भारत के मंदिरों से पहले ही ड्रेस कोड लागू हैं। इनमें फिलीपींस का बैसिलिका माइनोरे डेल सैंटो नीनो डे सेबू पूजास्थल शामिल है, जहां 2024 में ही ड्रेस कोड लागू कर दिया गया था। यह फैसला पूजाघर की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया गया था। इसके मुताबिक, यहां आने वाले लोगों को मर्यादित कपड़े पहनकर आना जरूरी होगा। ऐसा न होने पर उन्हें शॉल पहननी होगी।
  • स्पेन में भी लोकप्रिय कैथेड्रल डी सेविया में पिछले साल दो महिलाओं को अमर्यादित कपड़े पहनने के चलते धार्मिक संस्थान में एंट्री से रोक दिया गया था।

  • इटली की चर्चों, कैथेड्रल और धार्मिक परिसरों में भी मर्यादित कपड़े पहनना अनिवार्य है। कई पूजास्थलों पर पुरुषों और महिलाओं को कंधे और घुटने तक ढकने वाले कपड़े पहनने के नियम हैं। 
  • जापान, जो कि पहले ही अपनी रुढ़िवादी संस्कृति के लिए जाना जाता है, वहां पूजास्थलों और मठों में जाने के लिए एक ड्रेस कोड लागू किया गया है। वे इ दौरान शरीर दिखाने वाले कपड़े नहीं पहन सकते। 

  • ब्रिटेन में गिरजाघरों का प्रबंधन संभालने वाली चर्च ऑफ इंग्लैंड ने 2016 में एक धर्मगुरु को निकाल दिया था। उन पर एक कार्यक्रम के दौरान काफी छोटे कपड़े पहनने का आरोप लगा था। 
  • 2010 में वैटिकन सिटी ने ऐसे पर्यटकों की ईसाई धर्मस्थलों में एंट्री बैन कर दी थी, जो कि मर्यादित कपड़ों में नहीं पहुंचे थे। ऐसे लोगों को ठीक ढंग से कपड़े पहनकर आने के बाद ही इस धार्मिक शहर में खुले तौर पर घूमने के आदेश दिए गए थे। 
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