फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्नाटक: संत सिद्धेश्वर स्वामी का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, लाखों ने दी श्रद्धांजलि

Tue, 03 Jan 2023 10:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू

सार

संत सिद्धेश्वर स्वामी के पार्थिव शरीर को अंतिम सम्मान देने के लिए राज्यभर के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोगों की भीड़ जिला मुख्यालय शहर में उमड़ी। उनके भक्त और अनुयायी उन्हें 'नादेडदुवा देवारू' (चलते हुए देवता) के रूप में मानते थे। 
विज्ञापन
Siddheshwar Swamis last rites - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विजयवाड़ा के ज्ञानयोगाश्रम के संत सिद्धेश्वर स्वामी के पार्थिव शरीर का मंगलवार को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। लाखों लोगों ने आध्यात्मिक नेता को अंतिम सम्मान दिया। सिद्धेश्वर स्वामी अपने विद्वतापूर्ण प्रवचनों और वाक्पटुता के लिए जाने जाते थे। वह बीते कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। सोमवार को 82 की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। 

विज्ञापन

 

Trending Videos

अंतिम सम्मान में जुटे लाखों भक्त और अनुयायी  
उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सम्मान देने के लिए राज्यभर के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोग जिला मुख्यालय शहर में जुटे। उनके भक्त और अनुयायी उन्हें 'नादेडदुवा देवारू' (चलते हुए देवता) के रूप में मानते थे। कई लोगों ने लोगों ने अपने प्रिय संत सिद्धेश्वर अप्पाव्रु को अश्रुपूर्ण विदाई भी दी। उनके भक्त और अनुयायी कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी फैले हुए हैं। 
 

'अंतिम अभिवादन पत्र' वाली वसीयत में संत ने क्या लिखा था?
संत सिद्धेश्वर स्वामी का अंतिम संस्कार उनकी इच्छा के अनुसार ज्ञानयोगाश्रम में किया गया, जिसे उन्होंने 2014 में गुरु पूर्णिमा के दिन गवाहों के रूप में दो जिला न्यायाधीशों द्वारा हस्ताक्षरित 'अंतिम अभिवादन पत्र' शीर्षक वाली वसीयत के रूप में रिकॉर्ड किया था। इसमें कहा गया है कि उनके नश्वर अवशेषों को आग की लपटों में चढ़ाया जाना है और दफनाया नहीं जाना है, कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं किया जाना है और उनकी राख को नदी या समुद्र बिखेरना है और उनकी स्मृति में कोई स्मारक या भवन बनना है। 
 
विज्ञापन

सरल जीवन जीते थे संत सिद्धेश्वर स्वामी
मृदुभाषी और सरल दिखने वाले संत सिद्धेश्वर स्वामी बहुत ही सरल जीवन जीते थे। आश्रम में अंतिम संस्कार से पहले यहां सैनिक परिसर में उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर कर्नाटक सरकार और पुलिस ने पूर्ण राजकीय सम्मान दिया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें