कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को अपनी सलाहकार परिषद का सदस्य नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है। इसके चलते कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (ओबीसी विभाग) के प्रमुख अनिल जयहिंद की ओर से लिखे गए एक पत्र में 24 लोगों के नाम प्रस्तावित किए गए और एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी मांगी गई। जयहिंद ने 9 जून को लिखे एक पत्र में ये नाम दिए, जिसे रविवार को ही सार्वजनिक किया गया।
सिद्धरमैया के अलावा सलाहकार परिषद के लिए प्रस्तावित अन्य नामों में कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भूपेश बघेल और वीरप्पा मोइली शामिल हैं।
हालांकि, सिद्धरमैया ने कहा कि इसका उनके राष्ट्रीय राजनीति में जाने से कोई लेना-देना नहीं है। उधर विपक्षी भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इस कदम को मुख्यमंत्री बदलाव की कवायद माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में, विशेषकर सत्तारूढ़ कांग्रेस में, इस वर्ष के अंत में मुख्यमंत्री बदलने की संभावना के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके लिए सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता-साझा करने संबंधी समझौते का हवाला दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा गाहे-बगाहे होती रहती है। डीके शिवकुमार और सीएम सिद्धारमैया के बीच ढाई-ढाई साल के फार्मूले की भी खूब चर्चा हुई। हाल ही में रणदीप सुरजेवाला के कर्नाटक दौरे को लेकर भी खूब चर्चाएं हुई थीं। तब भी ये दावा किया जा गया था कि अब डीके शिवकुमार राज्य के नए सीएम बन सकते हैं।
काफी समय से लग रही हैं ये अटकलें
पार्टी के कुछ नेताओं की हालिया टिप्पणियों से एक बार फिर इस वर्ष के अंत में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लगने लगी हैं। बीते कुछ समय से राजनीतिक हलकों में, खास तौर पर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चर्चा हो रही है कि इस साल के अंत में मुख्यमंत्री बदला जा सकता है। हालांकि पार्टी हाईकमान के सख्त निर्देशों के बाद खुलेआम ऐसी चर्चाओं से लोग बच रहे हैं।