इसी कड़ी में सोमवार को बेंगलुरु आए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था, नोटबंदी, आथिर्क प्रबंधन की विफलता, बैंकिंग व्यवस्था से भरोसा टूटने आदि को लेकर मोदी सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। अपने स्वभाव और प्रकृति से उलट मनमोहन सिंह ने मोदी पर प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिराने का आरोप लगाते हुए यह तक कह डाला कि अपने विरोधियों के खिलाफ प्रधानमंत्री पद और कार्यालय का जितना दुरुपयोग नरेंद्र मोदी ने किया है, उतना भारत के किसी दूसरे प्रधानमंत्री ने नहीं किया।
मोदी के मुकाबले सिद्धारमैया को खड़ा करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा आथिर्क सामाजिक विकास के हर पैमाने पर कर्नाटक सरकार ने गुजरात में मोदी सरकार के दौरान हुए विकास से कई गुना ज्यादा और बेहतर काम किया है। मनमोहन यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया ने कर्नाटक की जनता को जो प्रगतिशील, विकासवादी और असरदार नेतृत्व दिया है, उसकी मिसाल बहुत कम मिलती है। पूर्व प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार पर बेंगलुरु के विकास में संसाधन उपलब्ध कराने में भेदभाव का आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि मोदी सरकार अमेरिका में बेंगलुरू के उन तमाम युवाओं की नौकरियों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है, जो आई टी हब बेंगलुरु से पढ़ाई करके वहां गए।
भाजपा इस चुनाव को मोदी के नाम और चेहरे पर जीतना चाहती है, क्योंकि येदुयेरप्पा को लेकर न सिर्फ गैर लिंगायतों बल्कि लिंगायतों तक में असमंजस है। साथ ही राज्य में कोई दूसरा मजबूत और लोकप्रिय चेहरा न होने की वजह से शहरी और युवा मतदाताओं पर मोदी मैजिक का उसे सहारा है।
मोदी के चुनाव प्रचार से पहले भाजपा के समर्थक वर्ग में उत्साह की कमी साफ दिखाई पड़ रही थी, लेकिन मोदी के चुनाव प्रचार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और भाजपा के जनाधार में उत्साह बढ़ गया है। इसे लेकर कांग्रेस और जद(एस) दोनों ही खेमों में फिक्र दिख रही है। कांग्रेस इसकी काट के लिए ही चुनाव प्रचार में मनमोहन के बाद सोनिया को भी उतार रही है। राहुल गांधी तो कई दिन से प्रचार में हैं।