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एसआई भर्ती: 15-30 लाख दो और तीन 'बसों' में चढ़ जाओ, वहां मिला लीक प्रश्न पत्र, अफसरों ने की 'अमानत में खयानत'

Wed, 14 Oct 2026 07:18 PM IST
ज्योति भास्कर डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) - फोटो : Adobe Stock
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर ज़ोनल ऑफिस ने ओडिशा में सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2024 का प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में 9, 10 और 12 अक्टूबर को ओडिशा व पश्चिम बंगाल में 12 जगहों पर छापेमारी की है। इस दौरान सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड, पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड और उनके डायरेक्टरों व अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों की जांच की गई। जांच एजेंसी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिवाइस और रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिनकी आगे जांच की जा रही है। 

पैसे के बदले प्रश्न पत्र देने का लालच... 

यह मामला अक्टूबर 2025 में ओडिशा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। 30 सितंबर 2025 को ओडिशा पुलिस ने इच्छापुरम (आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा पर स्थित शहर) के पास तीन बसों को रोका। उनमें एसआई भर्ती परीक्षा-2024 के 114 उम्मीदवार सवार थे। आरोप है कि 5 और 6 अक्टूबर 2025 को होने वाली एसआई भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र प्रति उम्मीदवार 15 से 30 लाख रुपये नकद के बदले लीक किया गया था। बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। कथित तौर पर प्रश्न पत्र उन लोगों ने लीक किया था, जो परीक्षा आयोजित करने का काम संभालने वाली कंपनियों से जुड़े थे। इन कंपनियों से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया। उन्हें पैसे के बदले प्रश्न पत्र देने का लालच दिया। 

ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने रद्द की परीक्षा...

साथ ही गारंटी के तौर पर उनके ओरिजिनल सर्टिफिकेट भी ले लिए। सीबीआई द्वारा दायर चार्ज-शीट के अनुसार, मार्च 2025 में भी प्रश्न पत्र से जुड़ी कई अनियमितताएं हुई थीं, जब यही परीक्षा पहले आयोजित होने वाली थी, लेकिन बाद में ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) ने उसे रद्द कर दिया था। तलाशी के दौरान यह पता चला कि ओपीआरबी ने परीक्षा आयोजित करने का काम आईटीआई लिमिटेड को सौंपा था, जो केंद्र सरकार की एक पीएसयू है। इसके बाद, आईटीआई लिमिटेड ने यह काम भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) को सौंप दिया। 

संवेदनशील जानकारी के लिए तीसरी पार्टी...

हालांकि, एसटीपीएल ने अपने डायरेक्टर सुरेश चंद्र नायक के जरिए, आईटीआई लिमिटेड की लिखित अनुमति के बिना, उम्मीदवारों की संवेदनशील जानकारी संभालने के लिए तीसरी पार्टी पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया। इसमें पंचसॉफ्ट के डायरेक्टर शंकर प्रुस्टी की भी मिलीभगत थी। इसके बाद, सिलिकॉन टेकलैब और शंकर प्रुस्टी से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया और उन्हें पैसे के बदले परीक्षा के पेपर की गोपनीय जानकारी देने का लालच देकर उन्हें अपने साथ मिला लिया। जांच में आरोपी शंकर प्रुस्टी (पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर) और एसटीपीएल के बीच एसआई भर्ती परीक्षा-2024 की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कुछ लेन-देन का पता चला है, जो उनकी मिलीभगत को दिखाता है।

कथित शेयर खरीद समझौता...

जांच के दौरान यह भी पता चला कि सिलिकॉन टेकलैब की ज़्यादातर हिस्सेदारी पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड (जिसे पहले पटनायक स्टील इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) और उसके डायरेक्टर मिस्टर समीर रथ और उनकी पत्नी शाश्वती मिश्रा ने 5.8.2023 के एक कथित शेयर खरीद समझौते के तहत ले ली थी। ईडी इस समझौते की आगे जांच कर रही है। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों में से किसी भी कंपनी ने यह समझौता कभी भी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जमा नहीं कराया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि पीएसआईएल के डायरेक्टरों द्वारा एसटीपीएल में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल लेने के बावजूद, सुरेश चंद्र नायक एसटीपीएल में डायरेक्टर बने रहे। 

बिना इजाजत लिए एसआई भर्ती परीक्षा आयोजित...

कंपनी से बिना इजाजत लिए एसआई भर्ती परीक्षा आयोजित करने के संबंध में आईटीआई लिमिटेड के साथ बातचीत करते रहे। इसके अलावा, यह जानते हुए भी कि सुरेश चंद्र नायक बिना इजाजत एसआई भर्ती परीक्षा का काम संभाल रहे थे, समीर रथ या स्वस्ति मिश्रा ने आईटीआई लिमिटेड को इसकी जानकारी नहीं दी। बाद में, सुरेश चंद्र नायक ने बिना इजाजत परीक्षा के पेपर हासिल कर लिए। अब तक की गई जांच और तलाशी से उन कंपनियों/संस्थाओं की भूमिका का पता चला है जो अब तक एजेंसियों की जांच के दायरे से बाहर थीं। साथ ही, तलाशी से ओपीआरबी और अन्य कंपनियों/संस्थाओं से जुड़े लोगों सहित अन्य व्यक्तियों की संभावित भूमिका का भी पता चला है। ऐसी संस्थाएं पूरी परीक्षा प्रक्रिया से गहराई से जुड़ी हुई पाई गई हैं। अब तक की गई जांच और तलाशी के दौरान मिले सबूतों से संकेत मिलता है कि प्रश्न पत्र लीक होने की घटना सुनियोजित तरीके से हुई और उम्मीदवारों से नकद के रूप में अपराध से भारी कमाई की गई।

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