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Axiom4-Mission: छात्रों और इसरो वैज्ञानिकों से संवाद करेंगे शुभांशु शुक्ला, हैम रेडियो के जरिए होगा संपर्क

Mon, 30 Jun 2025 09:43 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Axiom4-Mission: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से हैम रेडियो के जरिए इसरो वैज्ञानिकों और छात्रों से संवाद करेंगे। यह संपर्क एआरआईएसएस पहल और टेलीब्रिज तकनीक के माध्यम से यूआर राव उपग्रह केंद्र, बंगलूरू में स्थापित किया जाएगा।
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शुभांशु शुक्ला और एक्जियोम-4 क्रू के अन्य सदस्य - फोटो : Axiom Space
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला शुक्रवार शाम को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से इसरो के वैज्ञानिकों और स्कूल छात्रों से हैम रेडियो के जरिए बातचीत करेंगे। यह बातचीत बंगलूरू स्थित यू आर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) में एक टेलीब्रिज के माध्यम से होगी। टेलीब्रिज एक प्रकार की दूरसंचार प्रणाली होती है, जिसमें धरती पर स्थित एक ग्राउंड स्टेशन किसी उपग्रह या अंतरिक्ष यान से संपर्क स्थापित करता है और फिर उस सिग्नल को टेलीफोन या इंटरनेट के माध्यम से किसी अन्य स्थान तक पहुंचाता है। 
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यह कार्यक्रम'अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर शौकिया रेडियो' (एआरआईएसएस) के जरिए आयोजित किया जाएगा। एआरआईएसएस को आमतौर पर हैम रेडियो कहा जाता है। इस कार्यक्रम में छात्रों को अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों से संवाद करने का मौका मिलेगा। शुक्ला इस समय एक्सिओम-4 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 14 दिन की वैज्ञानिक यात्रा पर हैं।

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एआरआईएसएस पहल का मकसद दुनियाभर के छात्रों को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) के क्षेत्र में करियर अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल में छात्र हैम रेडियो की मदद से आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों से सीधे संवाद कर सकते हैं। एआरआईएसएस ने एक्स पर लिखा, भारत से संपर्क होने वाला है! एक्सिओम-4 मिशन के चालक दल के सदस्य शुभांशु शुक्ला (वीयू2टीएमआई) हैम रेडियो के जरिए यू आर राव उपग्रह केंद्र से बातचीत करेंगे। यह संपर्क शुक्रवार, 4 जुलाई को भारतीय समय अनुसार शाम 3:47 बजे पर के6डीयूई टेलीब्रिज के जरिए होगा। 

हैम रेडियो एक गैर-व्यावसायिक रेडियो सेवा है, जिसे वही लोग संचालित कर सकते हैं, जो प्रशिक्षित हैं और जिनके पास लाइसेंस हैं। आपातकाल या आपदा की स्थिति में जब अन्य संचार सेवाएं बंद हो जाती हैं, तब हैम रेडियो बेहद उपयोगी साबित होता है।

इस बीच, शुभांशु शुक्ला रविवार को आईएसएस पर स्पेस माइक्रोएल्गी प्रयोग में व्यस्त थे। उन्होंने प्रयोग के लिए सैंपल बैग लगाए और एल्गी की तस्वीरें लीं। माइक्रोएल्गी छोटे, एककोशिकीय या बहुकोशिकीय सूक्ष्मजीव होते हैं जो पानी में रहते हैं। ये प्रकाश संश्लेषण कर ऑक्सीजन पैदा करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। ये पौधों की तरह ही ऊर्जा के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हैं।

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एक्सिओम स्पेस ने बताया कि ये सूक्ष्म जीव अंतरिक्ष में भविष्य की खोज के लिए बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। ये लंबे अंतरिक्ष अभियानों में पोषक तत्वों से भरपूर, टिकाऊ खाद्य स्रोत बन सकते हैं। एक्सिओम-4 मिशन के तहत 'न्यूरो मोशन वीआर' प्रोजेक्ट पर भी काम किया गया। इस प्रयोग में अंतरिक्ष यात्री वीआर हेडसेट पहनते हैं और फोकस करने वाले कार्य करते हैं। उनके मस्तिष्क की गतिविधियों को 'फंक्शनल निअर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी' तकनीक से मापा जाता है। यह अध्ययन यह समझने में मदद करेगा कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण मस्तिष्क और शरीर की गतिविधियों पर कैसे असर डालता है।

इसके अलावा,'टेलीमैट्रिक हेल्थ एआई' नामक अध्ययन के लिए भी डाटा एकत्र किया गया। यह प्रोजेक्ट अंतरिक्ष उड़ान के दौरान हृदय और संतुलन प्रणाली पर प्रभाव को समझने के लिए बायोमेट्रिक डाटा को मिशन एनालिटिक्स से जोड़ता है। एक्सिओम स्पेस के अनुसार, इस तरह का उन्नत डाटा विज्ञान तकनीकों का उपयोग करके अंतरिक्ष और पृथ्वी पर स्मार्ट और रियल टाइम स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली विकसित की जा सकती है।

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