अधिवक्ता शुभम अवस्थी को भारत सरकार के कानून मंत्रालय द्वारा महत्वपूर्ण दायित्व सौपे गये हैं । राष्ट्रपति के आदेश से जारी अधिसूचना के अनुसार, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में केंद्र सरकार के पैनल अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली में सीनियर पैनल काउंसल के रूप में भी नियुक्ति प्रदान की गई है। यह नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से उनके जनपद में हर्ष का वातावरण है, तथा विभिन्न क्षेत्रों से उन्हें बधाइयाँ प्राप्त हो रही हैं।
अधिवक्ता शुभम अवस्थी की शैक्षिक पृष्ठभूमि भी अत्यंत सशक्त रही है। उन्होंने अपनी 12वीं की शिक्षा सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, कानपुर से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने एल.एल.बी. एवं एल.एल.एम. की डिग्री एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा से अर्जित की। वर्ष 2016 में बार काउंसिल में पंजीकरण के साथ उन्होंने अपने विधिक करियर की शुरुआत की।
अधिवक्ता शुभम अवस्थी
वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन एवं दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य हैं। साथ ही, उन्हें बार काउंसिल ऑफ दिल्ली द्वारा लीगल एड कमेटी का सदस्य भी नियुक्त किया गया। अपनी विधिक दक्षता, समर्पण और प्रभावशाली पैरवी के बल पर उन्होंने अल्प समय में ही राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है।
कानून मंत्रालय द्वारा चयनित पैनल अधिवक्ताओं को देश के सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार की ओर से महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी का दायित्व सौंपा जाता है, जो इस नियुक्ति के महत्व को और अधिक रेखांकित करता है।
उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता शुभम अवस्थी को हाल ही में 40 अंडर 40 वकील पुरस्कार से नई दिल्ली में सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन ड्राइव, लंदन द्वारा भारत का डिप्टी सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया गया है।वर्तमान में वे विभिन्न सरकारी पैनलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं तथा राष्ट्रीय नीति से जुड़े विषयों पर अपनी विधिक विशेषज्ञता प्रदान कर रहे हैं।
इस अवसर पर अधिवक्ता शुभम अवस्थी ने कहा, यह मेरे लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का क्षण है। भारत सरकार द्वारा मुझ पर जताया गया यह विश्वास मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है। मैं पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करूंगा। मेरा प्रयास रहेगा कि मैं न्यायालय के समक्ष सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करूं।