अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण जनता के आर्थिक सहयोग से किया जाएगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के महासचिव एवं विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपतराय ने शनिवार को यहां कहा कि मंदिर का निर्माण सरकारी पैसे से नहीं होगा।
उन्होंने कहा, जनसंपर्क और निधि संकलन का काम मकर संक्रांति से शुरू हो जाएगा। साढ़े चार लाख गांवों और 11 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
शनिवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में चंपतराय ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि को प्राप्त करने के लिए लाखों भक्तों ने कष्ट सहे। 500 साल तक संघर्ष किया। उसी प्रकार हम सभी चाहते हैं कि मंदिर करोड़ों लोगों के स्वैच्छिक सहयोग से बने। स्वाभाविक है जब जनसंपर्क होगा लाखों कार्यकर्ता गांव-गांव और मोहल्लों में जाएंगे। समाज स्वेच्छा से कुछ न कुछ सहयोग करेगा। भगवान का काम है, मंदिर भगवान का घर है, भगवान के कार्य में धन बाधा नहीं बन सकता। समाज का समर्पण कार्यकर्ता स्वीकार करेंगे।
उन्होंने कहा कि, आर्थिक विषय में पारदर्शिता बहुत आवश्यक है जिसे बनाए रखने के लिए हमने 10 रुपये, 100 रुपये,1000 रुपये के कूपन व रसीदें छापी हैं। समाज जैसा देगा उसी के अनुरूप कार्यकर्ता पारदर्शिता के लिए कूपन या रसीद देंगे। करोड़ों घरों में भगवान के मंदिर का चित्र पहुंचेंगा।
मकर संक्रांति से शुरू होगा निधी संकलन -चंपतराय
जनसंपर्क का यह कार्य मकर संक्रांति से प्रारंभ करेंगे और माघ पूर्णिमा तक पूर्ण होगा। उन्होंने दावा किया कि देश का कोई कोना छोड़ा नहीं जाएगा। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान निकोबार, कच्छ के रण से पर्वतीय क्षेत्र सभी कोनों तक जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में भूमिपूजन कर मंदिर निर्माण को गति दी है। अब मंदिर निर्माण की तैयारी चल रही है।
शीघ्र सामने आएगा मंदिर की नींव का प्रारूप
चंपत राय ने कहा कि शीघ्र ही मंदिर की नींव का प्रारूप सामने आएगा। संपूर्ण मंदिर पत्थरों का बनेगा जिसकी प्रत्येक मंजिल की उंचाई 20 फिट, लंबाई 360 फिट तथा चौड़ाई 235 फिट होगी। मंदिर का फर्श धरातल से 16.5 फिट ऊंचा बनेगा। आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी चेन्नई तथा आईआईटी गुवाहाटी, सीबीआरआई रुड़की, लार्सन टुब्रो व टाटा के इंजीनियर नीव की ड्राइंग पर आपस में परामर्श कर रहे हैं।