ओलंपिक में पदक का रोना रोने वालों के लिए अपने शहर की बिटिया 11 साल की जलपरी श्रद्धा शुक्ला कई सालों से उम्मीद की किरण बनी है, लेकिन अफसोस न तो अफसर और न ही नेता बिटिया के लिए आगे आ रहे हैं। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुकी बिटिया के पिता सीएम से लेकर पीएम तक सहायता की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा। वह ढाई साल की उम्र से गंगा में तैरकर रिकॉर्ड्स बना रही है।
अब बिटिया अपने पुराने रिकॉर्ड (गंगा में 280 किलोमीटर की तैराकी, कानपुर से इलाहाबाद तक) को तोड़ने के लिए फिर गंगा में है। वह कानपुर से वाराणसी तक 570 किलोमीटर की यात्रा पर निकली है और सात दिन में वाराणसी पहुंचेगी। रविवार को मैस्कर घाट पर जलपरी की यात्रा को एमएलसी डॉ. राजपाल कश्यप ने हरी झंडी दिखाई। सेना के जवानों की सलामी के बीच बिटिया गंगा में उतरी। उसके साथ सहारनपुर के डॉ. सुभाष कालरा, दो नाव, चार नाविक रवाना हुए। यात्रा के पूर्व आयोजित समारोह पर सिद्धार्थ कपूर, बाबा अशोक तिवारी, निशांत सिंह जादौन आदि मौजूद रहे।
लखनऊ फाटक स्थित दोसर वैश्य स्कूल में श्रद्धा कक्षा 9 की छात्रा है। मैस्कर घाट किनारे स्थित झोपड़ी उसके रहने का ठिकाना है। बाबा मुन्नू लाल रिवर बैंक स्कूल में पूजा पाठ करते हैं। पिता ललित कुमार शुक्ला घर के बाहर चाय की दुकान लगाते हैं। परिवार में मां वंदना देवी और दादी राजे देवी के अलावा भाई राजेंद्र है। बाबा का कहना है कुछ लोग बेटी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। सरकार से आज तक कोई मदद नहीं मिली।