12 साल की बच्ची खेत में खड़े होकर, पिंक रंग का लंहगा और बैंगनी रंग का ब्लाउज पहनकर हरियाणा के एक मशहूर गाने- मेरी जलती जवानी मांगे पानी पानी पर नाचते हुए दिखाई देती है। यह 15 सेकेंड की एक वीडियो क्लिप है जो सोशल मीडिया ऐप क्वाई पर काफी लोकप्रिय हो रही है। दूसरे वीडियो में यह लड़की उन्हीं कपड़ो में अपनी उम्र के एक लड़के के साथ नाचते हुए दिखाई दे रही है। इस वीडियो क्लिप में लड़की लड़के के ऊपर गिर जाती है। इस तरह की कम से कम 560 से ज्यादा वीडियो गांव की बच्चियां नाम के अकाउंट से पोस्ट की गई हैं। इस अकाउंट के 98,000 फालोवर्स हैं।
कुछ वीडियो में दो से तीन साल की बच्चियां हैं। जो लिप-सिंक (किसी गाने में होंठ हिलाना) या अपनी उम्र के हिसाब से अलग तरीके से नाचते हुए दिखाई देती हैं। बच्चियां खाना बनाते हुए और कुएं से पानी निकालते हुए भी नजर आती हैं। इन वीडियो पर ज्यादातर कमेंट करने वाले पुरुष हैं जो बच्चियों के शरीर पर कमेंट करते हुए उन्हें और शरीर दिखाने के लिए कहते हैं। सोशल वीडियो ऐप्स जिनमें यूजर 15 सेकेंड की वीडियो पोस्ट कर सकते हैं वह फीडोफाइल (बच्चों के प्रति यौन आकर्षण) के लिए आसान शिकार वाली जमीन बनता जा रहा है।
साइबर पीस फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक नीतीश चंदन का कहना है, 'शॉर्ट वीडियो नाबालिग लड़कियों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिए तैयार करने का आसान रास्ता है।' चंदन की संस्था चाइल्ड पोर्न के मामलों पर काम करती है। यह संस्था बाल यौन शोषण, शोषण, बुली और ब्लैकमेल से निपटती है, जिसमें अपराधी सोशल वीडियो ऐप के जरिए पीड़िता की खोज करता है। इंटरनेट का इस्तेमाल करना सस्ता हो गया है ऐसे में शॉर्ट वीडियो सोशल मीडिया ऐप्स क्वाई और टिकटॉक को पिछले कुछ सालों में लाखों फालोवर्स मिल गए हैं।
क्वाई, टिकटॉक और क्लिप ऐप्स का भारत के निचले या निचले मध्यम वर्ग के यूजर्स को अपना लक्ष्य बनाना है। इसकी भारत पर अच्छी पकड़ बन गई है। क्वाई ने चीन के बाद भारत के बाजार को अपनी प्राथमिकता बनाया है। उसका दावा है कि भारत में उसके 10-15 मिलियन यूजर हैं। टिकटॉक को चीनी कंपनी बाइटडांस ने बनाया है। इसकी भी प्राथमिकता भारतीय बाजार है और इसके फरवरी 2018 तक यहां 15 मिलियन यूजर्स हो गए थे। वहीं क्लिप ऐप को बेशक भारत ने बनाया है लेकिन चीन की शुनवेई कैपिटल इसकी निवेशक है, इसके दिसबंर 2017 तक 3 मिलियन यूजर्स थे।
इन सभी ऐप्स में ज्यादातर कटेंट कम कपड़ों वाली महिलाओं या नाबालिग लड़कियों और लड़कों का होता है जो बाथरुम में या पूल में पोज देते, अश्लील गानों पर लिप सिंक करते हुए या दर्शकों से फ्लर्ट करते हुए दिखाई देते हैं। तिरुवंनतपुरम के एक कार्यकर्ता जिन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले एक चाइल्ड पोर्न रैकेट का भंडाफोड़ किया है, उन्होंने बताया, 'यह शॉर्ट वीडियो बच्चों को उनके अपराधियों के बीच सहज महसूस करवाने की एक प्रक्रिया होती है। अपराधी पहले बच्ची को न्यूड होने के लिए कहता है उसके बाद उनसे दूसरे तरीके के फेवर मांगता है।' यह सब होने के बावजूद सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।