कैट प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह महाराष्ट्र एवं उड़ीसा सरकार की तरफ से जारी उस आदेश को वापस लेने के लिए कहे, जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों को सभी वस्तुओं के व्यापार करने की मंजूरी दी गई है।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया के अनुसार, अगर ई-कॉमर्स कंपनियों को सभी प्रकार की वस्तुओं के व्यापार की अनुमति दी जाएगी और स्थानीय दुकानों पर लॉकडाउन का प्रतिबंध लगेगा, तो दुकानदार बर्बाद हो जाएंगे।
जब लॉकडाउन 1.0 में स्थानीय दुकानदारों ने कोरोना के जोखिम के बीच जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला जारी रखी थी, तो अब लॉकडाउन में केंद्र सरकार को उन दुकानदारों के हितों का ध्यान रखना चाहिए था।
कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, अमेजन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को कारोबार की इजाजत देकर सरकार ने छोटे दुकानदारों के साथ धोखा किया है।
इन दुकानदारों ने पिछले एक माह के दौरान देश में जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी। बहुत से दुकानें बंद हैं, वे बिजली का बिल भर रहे हैं, अपने कामगारों को सेलरी भी दे रहे हैं, टैक्स भी दे रहे हैं, मगर इसके बावजूद सरकार ने उन पर वार कर दिया।
3 मई तक ई-कॉमर्स कंपनियां टीवी, फ्रिज, मोबाइल, कपड़ा व ज्वेलरी आदि सामान बेचेंगी और स्थानीय दुकानदार लॉकडाउन 2.0 का पालन करेंगे। सरकार की इस भेदभावपूर्ण नीति का जमकर विरोध किया जाएगा।