उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, सचेतक को मान्यता देना अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह इस अदालत के समक्ष कार्यवाही की यथास्थिति को बदल रहा है। अध्यक्ष ने आधी रात को नए सचेतक की नियुक्ति की।
महाराष्ट्र की सियासत पर छाई सियासी धुंध भले ही धीरे-धीरे साफ हाे रही हो, लेकिन घमासान अभी भी जारी है। अब एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।उद्धव गुट की ओर से नए स्पीकर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
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दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा में एक दिन पहले नए स्पीकर के रूप में राहुल नार्वेकर का चुनाव किया गया। इसके ठीक बाद उन्होंने शिवसेना गुट के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु को हटाकर भरत गोगावले को उनकी जगह नियुक्त कर दिया। इतना ही नहीं अजय चौधरी को भी विधायक दल के नेता पद से हटाकर एकनाथ शिंदे को नेता नियुक्त कर दिया था।
स्पीकर के इस फैसले के खिलाफ उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उद्धव खेमे की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा है, सचेतक को मान्यता देना अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह इस अदालत के समक्ष कार्यवाही की यथास्थिति को बदल रहा है। अध्यक्ष ने आधी रात को नए सचेतक की नियुक्ति की।
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11 जुलाई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
उद्धव गुट की ओर से दायर की गई इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 11 जुलाई को सुनवाई करेगा। सिंघवी की ओर से लगाई गई याचिका पर न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि नई याचिका पर लंबित अन्य मामलों के साथ 11 जुलाई को उसी पीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी।
विधायकों की अयोग्यता मामले में भी 11 को सुनवाई
इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने एक जुलाई को कहा था कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उन 15 बागी विधायकों को विधानसभा से निलंबित किए जाने का अनुरोध करने वाली शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु की याचिका पर 11 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिनके खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं।