सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने को संसद से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद शिवसेना ने गुरुवार को आश्चर्य जताते हुए कहा कि आरक्षण दे देने के बाद नौकरियां कहां से आएंगी। गुरुवार को शिवसेना ने आश्चर्य व्यक्त किया कि नौकरियां कहां से आएंगी। पार्टी ने साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह एक चुनावी चाल है तो यह महंगा साबित होगी।
केंद्र और महाराष्ट्र और महाराष्ट्र दोनों जगह सत्ताधारी भाजपा के एनडीएम गठबंधन में शामिल पार्टी शिवसेना ने कहा कि भारत में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है। 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को नौकरी देना अपराध है लेकिन बाल श्रम लगातार जारी है।
शिवसेना ने दावा किया कि 2018 में रेलवे में 90 लाख नौकरियों के लिए 2.8 करोड़ लोगों ने आवेदन किया। इसके अलावा मुंबई पुलिस में 1,137 पदों के लिए चार लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किया और कई आवेदक आवश्यक योग्यता से अधिक शैक्षणिक योग्यता रखते थे।
सामना के लेख में पकौड़ा तलने वाले बयान पर भी चुटकी ली गई है। कहा गया है कि सरकार के 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद क्या योग्य युवा कुछ हासिल कर पाएंगे। युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा।