महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से राज ठाकरे की मुलाकात को भी अब शिवसेना ने महाराष्ट्र की अस्मिता से जोड़ दिया है। राज्य में सत्तासीन शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने राज्यपाल से मुलाकात करने पर शनिवार को मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे पर परोक्ष रूप से हमला बोला और इसे महाराष्ट्र का अपमान बताया।
संजय राउत ने शनिवार को राज ठाकरे का नाम लिए बिना उन पर व्यंग्य कसा कि कुछ लोग मुख्यमंत्री से मिलने की बजाए अपनी समस्याएं लेकर राज्यपाल के पास जाते हैं। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के लोकनियुक्त मुख्यमंत्री हैं। उनके पास कार्यकारी अधिकार है। जबकि राज्यपाल के पास कार्यकारी अधिकार नहीं होता।
राउत ने कहा कि राज्यपाल से मिलना महाराष्ट्र का अपमान है। उन्होंने शनिवार को पुणे में यह बातें कही। वैसे, महाराष्ट्र के राज्यपाल का राजभवन सभी के लिए खुला है। एक साल में उन्होंने राजभवन में जितने लोगों से मुलाकात की है, शायद ही राज्य के अन्य राज्यपालों ने इतने लोगों से मिलने की जहमत उठाई होगी।
मनसे ने भी किया शिवसेना पर पलटवार
संजय राउत के इस बयान के बाद मनसे ने भी पलटवार किया है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने ट्विटर पर राउत और राज्यपाल कोश्यारी की मुलाकात की तस्वीर पोस्ट करते हुए ट्वीट किया कि महाराष्ट्र का अपमान करते संजय राउत। इस तस्वीर में राउत, कोश्यारी के सामने पूरी तरह नतमस्तक दिखाई दे रहे हैं।
'पवार की सलाह से किसी को परेशानी क्यों?'
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार शरद पवार चला रहे हैं। इस पर राउत ने कहा कि जब 1995 में शिवसेना-भाजपा की सरकार थी तब आरोप लगते थे कि सरकार बाल ठाकरे चला रहे हैं। यदि महाविकास आघाड़ी सरकार पवार की सलाह से चल रही है तो किसी के पेट में क्यों दर्द हो रहा है।
पंकजा मुंडे के बारे में जानकारी नहीं: राउत
वहीं, भाजपा सचिव पूर्वमंत्री पंकजा मुंडे को शिवसेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिए जाने के सवाल पर राउत ने कहा कि मैंने उन्हें ऐसा कोई ऑफर नहीं दिया है। शिवसेना में ऐसा ऑफर केवल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे देते हैं। पंकजा मुंडे के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
फडणवीस में राष्ट्रीय नेता बनने की क्षमता
राउत ने पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को लेकर कहा कि वे युवा हैं, उनमें राष्ट्रीय नेता बनने की क्षमता है। वैसे भी राज्य के नेता के रूप में उनका हमने हमेशा सम्मान किया है। कोई भी सत्ता के लिए अमर होकर नहीं आया है, लेकिन दोबारा मुख्यमंत्री न बन पाने के झटके से वे अभी तक उबर नहीं पाए हैं।