धौरहरा में जितिन प्रसाद के जनाधार में बड़ी सेंध कभी दस्यु सरगना रहे मलखान सिंह यादव लगा रहे हैं। बरेली में कु. समन ताहिर, मिश्रिख में अरुण कोरी को 50 हजार तक मत मिलने की उम्मीद है। अकबरपुर में महेंद्र सिंह यादव लड़ रहे हैं तो सुल्तानपुर में कमला यादव भाजपा प्रत्याशी मेनका यादव की राह आसान बना रही हैं।
यही स्थिति बस्ती में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बालगोपाल यादव की भी है। वह वहां गठबंधन के प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाते नजर आ रहे हैं। प्रतापगढ़ में जयसिंह यादव राजकुमारी रत्ना सिंह के लिए परेशानी का सबब बने हैं। गोरखपुर में श्यामनारायण यादव ने भाजपा के रवि किशन की राह आसान बना दी है। इलाहाबाद में अभिमन्यु सिंह पटेल भी 50 हजार मत पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के मीडिया प्रभारी रुपेश पाठक हैं। रुपेश पाठक वोट कटवा के सवाल के जवाब में कहते हैं कि हमारा जन्म ही इसलिए हुआ है। रूपेश के अनुसार समादवादी पार्टी में झगड़े के बाद ही प्रगतिशील समाजवादी पार्टी है। इसलिए हम दो पहचान वाले लोगों के बीच में विवाद से ही अपनी जगह बना सकेंगे। वह हम कर रहे हैं और चार महीने पुरानी पार्टी के प्रत्याशी करीब 12-15 सीटों पर अच्छा लड़ रहे हैं।
रुपेश को यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उनके प्रत्याशी सपा-बसपा और कांग्रेस की जीत की राह को मुश्किल कर रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस की पहचान का विरोध करके समाजवादी पार्टी खड़ी हुई, समाजवादी पार्टी (पिछड़ों) और कांग्रेस, भाजपा का विरोध करके बहुजन समाजवादी पार्टी ने अपना आधार बनाया।
भाजपा ने हिंदू और मुसलमान के बीच में विवाद खड़ा करके धर्म के आधार अपनी जगह बनाई। रूपेश का कहना है कि यह हमारी सफलता है कि हमारे प्रत्याशी 50 हजार से एक लाख तक वोट लाने में सक्षम दिखाई दे रहे हैं। अब कोई वोट कटवा कहे तो यह उसका अपना मत है।