कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दखल देने के आरोपों को खारिज कर चुनाव आयोग पर भरोसा जताया। एनडीए ने गड़बड़ियों का आरोप लगाकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। पूरा मामला क्या है, पढ़िए रिपोर्ट-
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को विपक्ष के उस आरोप को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में दखल दे रही है। उन्होंने भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर में काम कर रहे सभी अधिकारी निर्वाचन आयोग (ईसी) के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर कोई आरोप है तो निर्वाचन आयोग उसकी जांच करे।
एनडीए के नेताओं ने क्या मांग की?
दरअसल, सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी अंबुकुमार को शिकायत सौंपी। इसमें आरोप लगाया गया कि राज्य में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हो रही हैं। उन्होंने इस मामले की तुरंत जांच कराने और सभी गणना फॉर्म की घर-घर जाकर दोबारा जांच कराने की मांग की।
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एनडीए नेताओं ने यह भी मांग की कि अगर जांच में कोई अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति इन कथित गड़बड़ियों का जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आरोपों पर सीएम ने क्या कहा?
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस को भी निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर कराने के तरीके पर कुछ आपत्तियां हैं। इस मुद्दे पर पार्टी कोर्ट भी गई है। कोर्ट ने आदेश दिया है और तय समय-सीमा को लेकर कांग्रेस फिर कोर्ट जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लोगों के मतदान के अधिकार की रक्षा करने के लिए राज्य सरकार निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर यह प्रक्रिया पूरी करा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का कोई भी व्यक्ति एसआईआर प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। इस काम में लगे अधिकारी पूरी तरह निर्वाचन आयोग के आदेशों के अनुसार काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार लोगों से अपने मतदान के अधिकार की रक्षा करने की अपील कर रही है। मतदान का अधिकार ही लोगों की आजीविका की रक्षा करता है। वोट देने का अधिकार, जीने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि सरकार जनता को जागरूक कर रही है। निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने की अनुमति दी है।
शिवकुमार ने बताया कि कई सामाजिक संगठन भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। अधिकारी निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार एसआईआर का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों को के बारे में जागरूक कर रही है, इसलिए विपक्ष परेशान है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और जेडी(एस) ने निर्वाचन आयोग पर ही भरोसा नहीं जताया है। भाजपा और जेडी(एस) की शिकायत पर क्या फैसला लेना है, यह निर्वाचन आयोग तय करेगा।
कब तक चलेगी एसआईआर की प्रक्रिया?
कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया 30 जून से शुरू हुई। घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की यह प्रक्रिया 29 जुलाई तक चलेगी।
भाजपा और जेडीएस ने क्या आरोप लगाए?
पिछले कुछ दिनों में भाजपा और जेडी(एस) ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह बड़े पैमाने पर शिविर लगाकर अवैध प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने में मदद कर रही है। विपक्ष ने कुछ वीडियो भी जारी किए। उनका दावा है कि घर-घर जाकर जांच करने के बजाय सामूहिक पंजीकरण शिविर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर अधिकारियों का गलत इस्तेमाल करने और एसआईआर प्रक्रिया को कमजोर करने का भी आरोप लगाया।
शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार अब तक करीब 4.5 करोड़ लोगों को जाति प्रमाण पत्र जारी कर चुकी है। इन प्रमाण पत्रों को अब ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा भी दी गई है। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को निवास प्रमाण पत्र भी दिए जा रहे हैं, ताकि वे एसआईआर प्रक्रिया में आसानी से भाग ले सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत कम लोगों के पास वर्ष 2002 में मतदाता पंजीकरण से जुड़े पुराने दस्तावेज होंगे। इसलिए सरकार ने उन्हें भी ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध कराई है।