शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मंगलवार को महंगाई में हो रही वृद्धि और आठ दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चार बार हुई बढ़ोतरी की कड़ी आलोचना की। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि इससे आम जनता का जीवन दूभर हो गया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार को डर है कि महंगाई से जनता का गुस्सा भड़क उठेगा और लोग सड़कों पर उतर आएंगे।
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक तल्ख संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि ईंधन की महंगाई सभी जरूरी चीजों को प्रभावित करती है। संपादकीय में कहा गया है, "सरकार इतनी डरी हुई है कि उन्होंने 'पीपली लाइव' फिल्म का गाना 'महंगाई डायन खाए जात है' पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसका सीधा मतलब है: महंगाई की आग में जल मरो, लेकिन दर्द का एक शब्द भी मत कहो। इस सरकार को कायर कहा जाना चाहिए।"
महंगाई डायन गाने पर प्रतिबंध का दावा
संपादकीय में आगे कहा गया है कि सरकार आलोचना से डरती है और मिमिक्री कलाकारों व स्टैंड-अप कॉमेडियनों से भी खौफ खाती है, यहां तक कि उन्हें जेल में भी डाल देती है। सरकार राजनीतिक विरोधियों से डरती है और उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल करती है। यह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे से डरती है, जिससे उन राज्यों के चुनावों को प्रभावित किया जा सके। सरकार ने 'ऑनलाइन' 'कॉकरोच जनता पार्टी' को धमकी दी और अब महंगाई पर लिखे एक गाने पर प्रतिबंध लगाकर, उसने खुद को एक भयभीत तानाशाह साबित किया है।"
संपादकीय में कटाक्ष करते हुए कहा गया है, "विडंबना यह है कि मोदी-भाजपा सरकार उसी 'महंगाई' गाने का इस्तेमाल करके सत्ता में आई थी, जिस पर अब उसने प्रतिबंध लगा दिया है। सुषमा स्वराज और स्मृति ईरानी सहित प्रमुख भाजपा नेताओं ने प्याज, दूध, सिलेंडर और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। उनके विरोध प्रदर्शनों से संसद गूंज गई थी। कांग्रेस ने कभी भी महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों या महंगाई पर गानों पर प्रतिबंध लगाकर लोकतंत्र को दबाने का कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया है, हालांकि, वर्तमान सरकार पूरी तरह से जनता की भावना के खिलाफ काम कर रही है क्योंकि वह भयभीत है।"
महंगाई से आम आदमी का जीवन हुआ दयनीय : सामना
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा, "जब फिल्म 'पीपली लाइव' 2010 में रिलीज हुई थी, तब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। फिल्म में रघुबीर यादव की आवाज में गाया गया गाना - 'सखी सैयां तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाए जात है' - एक आम आदमी के जीवन की कड़वी सच्चाई बताता है। पति आजीविका के लिए कड़ी मेहनत करता है और पर्याप्त कमाने की कोशिश करता है, लेकिन महंगाई सब कुछ निगल जाती है।"
संपादकीय में सवाल उठाते हुए कहा गया, "जब भी महंगाई का राक्षस कहर बरपाता है, इस गाने को याद किया जाता है। यहां तक कि अब, जब महंगाई ने आम आदमी का जीवन दयनीय बना दिया है, तो क्या गलत है अगर देश के लोग इस गाने को याद करते हैं?"
जनता के असंतोष को न दबाए सरकार
हालांकि, संपादकीय में कहा गया है कि केंद्र सरकार की नीति यह है कि इस गाने को याद भी नहीं किया जाना चाहिए। लेख में कहा गया, "अभिनेता आमिर खान प्रोडक्शंस के हैंडल पर पोस्ट किए गए इस गाने को थोड़े समय के भीतर हटा दिया गया। यह स्पष्ट है कि इसके पीछे सरकारी दबाव और उत्पीड़न है। वास्तव में, यह सिर्फ एक फिल्म का गाना नहीं है; यह कई वर्षों से जनता के असंतोष का प्रतीक रहा है। भाजपा को कभी यह गाना पसंद था, लेकिन अब उसकी सरकार इस गाने और इसमें छिपी गुस्से वाली भावनाओं से नफरत करती है।"
संपादकीय में तर्क दिया गया है कि अगर महंगाई के खिलाफ जनता का असंतोष है, तो सरकार को इसे दबाना नहीं चाहिए। सोशल मीडिया से इस गाने को हटाने से महंगाई खत्म नहीं होगी। इसके विपरीत, जनता के मन में सुलगता हुआ गुस्सा भयंकर रूप से भड़केगा। डर के खंभों पर खड़ी भाजपा की सत्ता की इमारत अब ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। 'महंगाई' पर गाने पर लगाया गया प्रतिबंध तो बस शुरुआत है।"