गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के बागी शिवसेना के निशाने पर हैं। शिवसेना उन नेताओं को चुन-चुनकर अपने पाले में ला रही है जो उम्मीदवारी न मिलने के कारण भाजपा से खफा हैं। शिवसेना की रणनीति भाजपा, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के नाराज नेताओं को पार्टी में शामिल कर गुजरात चुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेलने की है।
शिवसेना ने पिछले सप्ताह गुजरात में 50 से 75 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन उसके पास दमदार उम्मीदवारों का अभाव है। इसलिए शिवसेना ने भाजपा के बागी नेताओं पर डोरे डालना शुरू किया है। भाजपा उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद पार्टी में बगावत के सुर उभरे हैं।
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शिवसेना इसे भुनाने की फिराक में है। एक दिन पहले गुजरात में बजरंग दल के उप प्रमुख हरेश भट्ट शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुए। भट्ट का कहना है कि जिस हिंदुत्व के बल पर भाजपा सत्ता में आई है उसे ही भूल गई है। इसलिए वह हिंदुत्व की खातिर शिवसेना में शामिल हुए हैं।
गुजरात शिवसेना के प्रभारी हेमराज शाह ने कहा कि हम जमीनी हकीकत का अध्ययन कर रहे हैं। फिलहाल, पार्टी विधानसभा चुनाव में नोटबंदी और जीएसटी को मुद्दा बनाएगी। यह ऐसे मुद्दे हैं जो लोगों को प्रभावित करेंगे। वहीं, मराठी बहुल सीटों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दूसरी ओर, शिवसेना ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के आरक्षण की मांग का भी समर्थन किया है।