शिवसेना के चुनाव चिन्ह फ्रीज मामले पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने का फैसला चौंकाने वाला है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना कमजोर हो गई है। एनसीपी प्रवक्ता महेश तापसे ने कहा है कि निर्वाचन आयोग द्वारा शिवसेना के चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम पर रोक लगाने का फैसला आश्चर्यजनक और दर्दनाक है। लेकिन, यह आयोग का अंतिम निर्णय नहीं है।
दअरसल, शनिवार को एक अंतरिम आदेश के तहत चुनाव आयोग ने शिवसेना के चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि महाराष्ट्र की अंधेरी पूर्व विधानसभा में होने वाले उपचुनाव में दोनों गुट में से किसी को भी शिवसेना का चुनाव चिह्न "धनुष और तीर" का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उप-चुनावों के लिए होंगे अलग-अलग चुनाव चिह्न
चनाव आयोग के मुताबिक, दोनों गुटों को वर्तमान उप-चुनावों के लिए चुनाव आयोग द्वारा प्रतीकों की सूची दी जाएगी। दोनों को अलग-अलग प्रतीकों का आवंटन किया जाएगा, जिनमें से वे एक का चुनाव कर सकते हैं। ऐसे में दोनों गुटों को 10 अक्तूबर को दोपहर एक बजे तक का समय दिया गया है।
राकांपा-कांग्रेस ने किया उद्धव खेमे के उम्मीदवार का समर्थन
बता दें, अंधेरी पूर्व विधानसभा सीट पर तीन नवंबर को उपचुनाव होने हैं। इस सीट पर शिवसेना विधायक रमेश लटके का निधन हो गया था, जिसके बाद उद्धव गुट ने उनकी पत्नी रुजुता लटके को उम्मीदवार घोषित किया है, जिन्हें रांकापा व कांग्रेस ने समर्थन देने का एलान कर दिया है। दूसरी तरफ शिंदे गुट की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुरजी पटेल को मैदान में उतारा है।
दोनों गुटों ने ‘तीर धनुष’ पर ठोका था दावा
महाराष्ट्र में पिछले दिनों सियासी उठापटक व शिंदे गुट के अलग होने के बाद शिवसेना पर अधिकार को लेकर लड़ाई चल रही है। उद्धव व शिंदे गुट शिवसेना व उसके चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं। शिवसेना के ‘तीर धनुष’ चिह्न पर शिवसेना के एकनाथ शिंदे खेमे ने अपना दावा किया है, जबकि उद्धव का कहना है कि असली शिवसेना उनके साथ है।