शिवसेना ने वर्ष 1971 के युद्घ के दौरान पाकिस्तान में कथित तौर पर बंदी बनाए गए 54 सैन्य अधिकारियों का मामला उठाया। पार्टी ने इस मामले में सरकार पर दबाव में आने और अंतर्राष्ट्रीय अदालत में तथ्यों को ठीक से नहीं रखने का भी आरोप लगाया।
सांसद आनंद अडसूल ने कहा कि उस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के करीब एक लाख युद्ध बंदियों को रिहा किया। जबकि पाकिस्तान ने भारत के 54 युद्घबंदियों को रिहा नहीं किया। ये युद्घबंदी उसी समय से पाकिस्तानी जेलों में सड़ रहे हैं। शिवसेना सांसद ने कहा कि सरकार ने इस मामले को कभी गंभीरता से नहीं लिया।
ऐसा दबाव के कारण हुआ। उन्होंने कहा कि अपने वीर सैनिकों के लिए सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों और अंतर्राष्ट्रीय अदालत का उचित उपयोग नहीं किया। जबकि यह सीधे सीधे जिनेवा समझौते का उल्लंघन है।