महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शुक्रवार को शिवसेना के मुखपत्र सामना ने राज्य में बिग ब्रदर का दर्जा ले चुकी अपनी गठबंधन सहयोगी भाजपा को खरी-खरी सुनाई। भाजपा-शिवसेना की जीत के बावजूद आई कम सीटों के बारे में सामना ने लिखा कि महाराष्ट्र की जनता को सत्ता का उन्माद स्वीकार नहीं था और न है। जनता का सीधा रुझान है कि अति नहीं, उन्माद नहीं, वर्ना समाप्त हो जाओगे।
सामना ने संपादकीय में लिखा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अंतिम क्षण तक आत्मविश्वास था कि ईवीएम से सिर्फ कमल ही बाहर आएंगे लेकिन 164 में से 63 सीटों पर कमल नहीं खिले। यह जनादेश है, महाजनादेश नहीं। कांग्रेस-एनसीपी को करीब 100 सीटें मिलने पर अखबार ने लिखा कि यह एक प्रकार से सत्ताधीशों को सबक मिला है।
धौंस, दहशत और सत्ता की मस्ती से प्रभावित न होकर जनता ने मतदान किया है। नतीजों को चौंकाने वाले बताते हुए सामना ने लिखा कि जनता का संदेश साफ है कि सत्ता का दुरुपयोग करते हुए राजनीति करने से किसी को खत्म नहीं किया जा सकता। संपादकीय ने भाजपा पर सीधा हमला किया कि दूसरे दलों में सेंध लगाकर और दल बदलकर बड़ी जीत हासिल की जा सकती है, जनता ने इस भ्रम को तोड़ दिया। इससे सबक लेने की जरूरत है।
सामना ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार की प्रशंसा की और लिखा कि वह कसा हुआ नेतृत्व करते हुए एक जिद के साथ लडे़ और माटी की कुश्ती वाले उस्ताद के रूप में गदा जीत ली।