भंडारा जिला अस्पताल के शिशु केयर सेंटर में लगी आग से 10 नवजात की मौत के बाद महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार विपक्ष के निशाने पर है। वहीं, प्रशानिक मशीनरी पर भी आम लोगों का भी गुस्सा फूट पड़ा है। लेकिन शिवसेना ने अपना दोष देने के बजाय भंडारा की घटना पर केंद्र सरकार को घेरा है।
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र में ‘मृत स्वास्थ्य व्यवस्था’ शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा है जिसमें 10 नवजात की मृत्यु का ठीकरा इस पर या उस पर फोड़ने के बजाय स्वास्थ्य व्यवस्था पर आत्मचिंतन करने की सलाह दी है। शिवसेना ने लिखा है कि केंद्र सरकार ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है लेकिन सिर्फ दुख जताने से क्या होगा। भंडारा अस्पताल में स्मोक डिटेक्टर तक नहीं था। अस्पताल के कर्मचारी लापता थे। मुख्यमंत्री ठाकरे ने इसके जांच के आदेश दिए हैं।
शिवसेना ने मुखपत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में 100 बच्चों की मौत और भंडारा में नवजात की मौत का जिक्र करते हुए कहा है कि मुद्दा सिर्फ भंडारा का नहीं है, पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का दम घुट रहा है।
राजनीति कम करो, पं. नेहरू जैसा काम करो
शिवसेना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि थोड़ा राजनीति कम करो। चुनाव उधेड़बुन रोको। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरू के शासनकाल में जिस तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम हुआ उस तरह काम करो। एम्स जैसी संस्था पं. नेहरू ने ही तैयार करवाई। वैसी ही व्यवस्था प्रमुख शहरो में होनी चाहिए।