महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को साफतौर पर कहा कि हमने भाजपा के साथ गठबंधन करके अपने 25 साल बर्बाद किए। उन्होंने अपनी दशकों पुरानी सहयोगी भाजपा से अलग होने को बेहद दुखद निर्णय बताया, लेकिन साथ ही भविष्य में दोबारा गठबंधन के सवाल पर सीधे जवाब को टाल दिया। उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद दिल्ली नहीं जाने को लेकर भी कहा कि मेरी कोई मजबूरी नहीं है। जब मुझे आवश्यकता होगी, तभी दिल्ली जाऊंगा।
शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में उद्धव ने कहा, ईमानदारी से कहूं तो यह कोई खेल नहीं था। हम भाजपा के साथ पिछले 25-30 साल से थे और यह किसी भी तरह की राजनीतिक मजबूरी नहीं थी। हमारे प्रमोद जी (प्रमोद महाजन), नितिन जी (नितिन गडकरी), गोपीनाथ जी (गोपीनाथ मुंडे) और इनसे इतर अटल जी (अटल बिहारी वाजपेयी) के साथ संबंध थे। मैं उनके (भाजपा के) से अलग होकर बेहद व्यथित था।
यह मेरे लिए दुखद था... संकट के समय हमारी पार्टी उनके लिए पहाड़ की तरह खड़ी रही... हिंदुत्व पर हमले हो रहे थे, हमने उन्हें अपने ऊपर ले लिया...वे शिवसेना के साथ खड़े क्यों नहीं रह सके? भविष्य में भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना पर ठाकरे ने कहा, जो भी मैंने अब तक किया है, खुले दिल से किया है। जब हम भाजपा के साथ थे, तो उन्होंने दरवाजे बंद किए। मैं कई बार स्पष्ट कह चुका हूं कि हमने अपने 25 साल उनके (भाजपा) के साथ गठबंधन करके खराब कर दिए।
उद्धव ने किया सीएए का समर्थन, एनआरसी का करेंगे विरोध
भले ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भाजपा से गठबंधन को अपनी पार्टी के लिए समय बर्बाद करने वाला बताया हो, लेकिन भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर वह विपक्षी दलों से इतर अपनी पूर्व सहयोगी पार्टी के साथ खड़े दिखाई दिए। उद्धव ने कहा कि सीएए से किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि सीएए भारतीय नागरिकों को देश से बाहर निकालने के लिए नहीं है। इसलिए इसके खिलाफ प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं है।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट तौर पर कहा कि वे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा, एनआरसी से हिंदुओं और मुसलमानों पर असर पड़ेगा। एनआरसी के लिए आपको नागरिकता को प्रमाणित करना होगा। उन्होंने सवाल किया कि जंगलों और पहाड़ों में रहने वाले आदिवासी कहां से जन्म का सबूत लाएंगे? उद्धव ने अपने चचेरे भाई मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की ओर से सीएए और एनआरसी के समर्थन में मोर्चा निकालने के सवाल पर कहा कि एनआरसी वास्तविकता नहीं है। जो एनआरसी का समर्थन कर रहे हैं, उन पर भी इसका असर पड़ेगा।
घुसपैठियों को निकालना शिवसेना की पुरानी मांग
उद्धव ठाकरे ने कहा कि बांग्लादेशी और पाकिस्तानी शरणार्थियों को देश से बाहर निकालना शिवसेना की पुरानी मांग रही है। दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का अवैध घुसपैठियों के खिलाफ स्पष्ट रुख था कि उन्हें बाहर किया जाना चाहिए।
मेरा हिंदुत्व भाजपा से अलग
हिंदुत्व के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा और हमारे विचार एक जैसे नहीं हैं। धर्म का इस्तेमाल करना और सत्ता हथियाना मेरा हिंदुत्व नहीं है।
अदनान को पद्मश्री पुरस्कार का किया विरोध
मुख्यमंत्री ठाकरे ने पाकिस्तानी मूल के संगीतकार अदनान सामी का नाम लिए बिना कहा कि एक प्रवासी केवल प्रवासी होता है। आप उन्हें पद्मश्री से सम्मानित नहीं कर सकते।