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शिवसेना ने बीजेपी पर लगाया मनमानी का आरोप, स्वामी बोले- संसद नहीं चलती तो मैं क्या करूं

Fri, 06 Apr 2018 08:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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सुब्रमण्यम स्वामी
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भाजपा ने भले ही संसद में कामकाज न होने के कारण राजग सदस्यों द्वारा 23 दिन का वेतन-भत्ता नहीं लेने का एलान किया हो, लेकिन उसके इस फैसले से घटक दलों खासकर शिवसेना ने जमकर भड़ास निकाली है। शिवसेना ने यह फैसला मानने से इनकार करते हुए कहा कि भाजपा मनमानी कर रही है। वहीं, भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी वेतन-भत्ता ठुकराने से साफ मना कर दिया है।

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शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि यह फैसला लेते समय सरकार ने उनकी पार्टी से राय नहीं ली। जब हमारे सांसद हंगामा नहीं करते, तो हम अपना वेतन-भत्ता क्यों छोड़ें? सांसद की भूमिका महज संसद तक नहीं है। उन्हें अपने क्षेत्रों में भी काम करना होता है। सावंत ने राजग में तालमेल की कमी बताते हुए यहां तक कह दिया कि भाजपा अपने सहयोगियों के साथ महज राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चुनाव के लिए ही बात करती है। 

इसी कारण शिवसेना को अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा करनी पड़ी, जिसका नुकसान भाजपा को आम चुनाव में भुगतना पड़ेगा। वहीं सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि बतौर सांसद वह संसद में अपना कर्तव्य निभाते हैं। रोजाना संसद आते हैं। अगर कार्यवाही ठप होती है, तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, क्योंकि वह हंगामा नहीं करते। 
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स्वामी ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति ने मनोनीत किया है, फिर ऐसे में मैं अपना वेतन और भत्ता कैसे ठुकरा सकता हूं। वहीं राजग घटक आरएलएसपी नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा है कि उन्हें एनडीए सांसदों के वेतन-भत्ता छोड़ने की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि अनंत कुमार ने बुधवार को कहा था कि राजग के सभी सांसद 23 दिन का वेतन नहीं लेंगे।


वेतन-भत्ता छोड़े तो 3.66 करोड़ रुपये की होगी बचत
संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि राजग के 400 सांसद वेतन-भत्ते के रूप में 3.66 करोड़ रुपये छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के हंगामे के कारण बजट सत्र का दूसरा चरण पूरी तरह धुल गया। शुक्रवार को सत्र का आखिरी दिन है।

मंत्री ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह ‘नकारात्मक और गैरलोकतांत्रिक’ सियासत कर रही है और कर्नाटक चुनाव में उसे इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने वेतन-भत्ता छोड़कर ऐतिहासिक फैसला लिया है, अब कांग्रेस को निर्णय लेने दीजिए।

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