उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे
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किसी सदस्य का मुख्यमंत्री बदलने की चाह, पार्टी का विरोध नहीं : साल्वे
हरीश साल्वे ने दलील दी कि अगर पार्टी का कोई सदस्य मुख्यमंत्री को बदलना चाहता है तो वह पार्टी विरोधी नहीं है। अगर बड़ी संख्या में ऐसे विधायक हों जो मुख्यमंत्री के काम करने के तरीके से असंतुष्ट हैं और बदलाव चाहते हैं तो वे यह क्यों नहीं कह सकते कि नए नेतृत्व का ‘चुनाव’ होना चाहिए।
इस पर सीजेआई ने साल्वे से पूछा, क्या कोई सदस्य यह कहकर नई पार्टी बना सकता है कि नेता ने उनसे मुलाकात नहीं की। जवाब में साल्वे ने कहा, मैं पार्टी के भीतर एक असंतुष्ट सदस्य हूं। पार्टी में लोकतंत्र होना चाहिए। मैं कह रहा हूं कि राजनीतिक दल के भीतर दो समूह हैं।
हम सभी एक ही राजनीतिक दल हैं लेकिन सवाल है राजनीतिक दल का नेता कौन है। ऐसा कोई अदालती निर्णय नहीं है कि बैठक में शामिल नहीं होने पर आपकी सदस्यता चली जाएगी। साल्वे ने कहा, 1969 में कांग्रेस के भीतर भी ऐसा हुआ था।
पीठ ने पूछा, फिर शिंदे गुट का चुनाव आयोग से संपर्क का क्या उद्देश्य है?
पीठ ने पूछा, फिर शिंदे गुट का निर्वाचन आयोग के पास जाने का क्या उद्देश्य है? साल्वे ने जवाब दिया, उद्धव के सीएम पद से इस्तीफे के बाद कई राजनीतिक घटनाक्रम हुए और बीएमसी चुनाव भी करीब आ रहे हैं। शिंदे खेमे के दूसरे वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने तर्क दिया कि नई सरकार इसलिए नहीं आई कि मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट में हार गए बल्कि इसलिए कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
उद्धव ठाकरे, एकनाश शिंदे और देवेंद्र फडणवीस
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क्या पार्टी के लोकतंत्र पर अंकुश के लिए दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग संभव है
महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, अदालत को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या पार्टी के भीतर लोकतंत्र पर अंकुश लगाने के लिए दसवीं अनुसूची का ‘दुरुपयोग’ किया जा सकता है। क्या बहुमत के सदस्यों को पार्टी के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है?
शिंदे गुट का समर्थन करने वाले विधायक दल बदल कानून को बना सकते हैं ढाल
उद्धव ठाकरे गुट के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, जिन विधायकों ने शिंदे गुट का पक्ष लिया है, वे दूसरे दल के साथ विभाजन समूह का विलय कर संविधान की दसवीं अनुसूची (दल- बदल कानून) के तहत खुद को अयोग्यता से बचा सकते हैं। उनके पास कोई अन्य बचाव उपलब्ध नहीं है। सिब्बल ने कहा, एक बार जब आप निर्वाचित हो जाते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि राजनीतिक दल के साथ ‘नाभि’ टूट गई है। आपका अपने राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है।
उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और बालासाहेब ठाकरे
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रविवार तक हो जाएगा महाराष्ट्र मंत्रिमंडल का विस्तार: केसरकर
महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार रविवार तक हो जाएगा। बुधवार को शिवसेना शिंदे गुट के मुख्य प्रवक्ता दीपक केसरकर ने दावा किया है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले से मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होने के दावे में कोई तथ्य नहीं है।
केसरकर ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के दोनों गुटों के विवाद से जुड़े मामले की बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी। यह सुनवाई खत्म होने के बाद मैं मीडिया के सामने राज्य की राजनीतिक स्थिति के बारे में अपना पक्ष रखूंगा। इससे शिवसैनिकों के मन में पैदा हुआ भ्रम दूर हो जाएगा। मुझे विश्वास कि इसके बाद राज्य में गरमाई हुई राजनीति शांत हो जाएगी।
केसरकर ने कहा, मंत्रिमंडल के विस्तार की तारीख घोषित करने का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को है। इसलिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री आपस में तय करके मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख घोषित करेंगे। लेकिन किसी भी स्थिति में मंत्रिमंडल विस्तार में चार दिन से अधिक समय नहीं लगेगा।
शिवसेना को खत्म करने के हो रहे हैं प्रयास : उद्धव
शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा, उनकी पार्टी को पहले भी कई बार तोड़ने का प्रयास किया गया था लेकिन इस बार पार्टी को सिरे से खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उद्धव ठाकरे ने यहां अपने आवास मातोश्री में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।