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Shimla Agreement: क्या है शिमला समझौता, भारत-PAK सीजफायर के बीच क्यों उठा यह मुद्दा; ट्रंप ने ऐसा क्या कहा?

Sun, 11 May 2025 03:02 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shimla Agreement: क्या है भारत और पाकिस्तान के बीच का शिमला समझौता? दोनों देशों के बीच सीजफायर के दौरान यह मुद्दा क्यों उठा? ट्रंप की बयानबाजी का इससे क्या संबंध है? आइए इन सब सवालों का जवाब जानते हैं।
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शिमला समझौते को पाकिस्तान ने स्थगित किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का श्रेय लेने की पूरी जुगत लगा रहे हैं। ट्रंप ने शनिवार को शाम पांच बजकर 37 मिनट पर दोनों देशों के बीच सीजफायर का दावा किया। इसके बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री और भारत के विदेश सचिव ने आधिकारिक एलान कर इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी। हालांकि भारत ने इसके साथ ही साफ किया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच हुआ है, इसमें किसी तीसरे पक्ष का दखल नहीं है। हालांकि ट्रंप ने फिर कुछ ऐसी बयानबाजी की जिसकी चर्चा हर तरफ होने लगी। यह बयानबाजी थी भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के पेशकश की। अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों से शिमला समझौते के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने इस समझौते को पहले ही स्थगित करने का एलान कर रखा है?

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क्या है भारत और पाकिस्तान के बीच का शिमला समझौता? ट्रंप की बयानबाजी का इससे क्या सबंध है? ट्रंप की बयानबाजी की निंदा क्यों होने लगी है? आइए इन सब सवालों का जवाब जानते हैं। पहले जानते हैं ट्रंप ने क्या कहा है?

रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर पर लिखा, 'मुझे भारत और पाकिस्तान के मजबूत और अडिग नेतृत्व पर बहुत गर्व है, क्योंकि उनके पास यह जानने और समझने की शक्ति, बुद्धि और धैर्य है कि वर्तमान संघर्ष को रोकने का समय आ गया है, जो कई लोगों की मौत और विनाश का कारण बन सकता था। लाखों अच्छे और निर्दोष लोग मारे जा सकते थे! आपकी विरासत आपके बहादुर काम से बहुत बढ़ गई है। मुझे गर्व है कि अमेरिका ने आपको इस ऐतिहासिक और वीरतापूर्ण निर्णय पर पहुंचाने में मदद की। अभी चर्चा नहीं हुई है, लेकिन मैं इन दोनों महान देशों के साथ व्यापार को काफी हद तक बढ़ाने जा रहा हूं। इसके अलावा मैं आप दोनों के साथ मिलकर यह देखने के लिए काम करूंगा कि क्या इतने सालों के बाद कश्मीर के संबंध में कोई समाधान निकाला जा सकता है। भगवान भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व को अच्छी तरह से किए गए काम के लिए आशीर्वाद दें!!!'

ट्रंप के बयान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट के बाद देश में विपक्षी दलों की भौहें तन गई हैं। राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा, "... हमारी प्रेस वार्ता से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की। शिमला समझौते के तहत ये कतई उचित नहीं था। जो अपने आप को दुनिया के सरपंच समझते हैं उनका बायन हमारे जैसे विशाल देश के लिए सही नहीं है... हमारी सरकार की ओर से इसका सख्त प्रतिकार होना चाहिए। सवाल किसी पार्टी का नहीं है सवाल इस देश के मिजाज का है..." ट्रंप के बयान पर यह सवाल इसलिए खड़ा किया जा रहा है, क्योंकि 1971 में हुए शिमला समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान सभी विवादों और समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सीधी बातचीत से करेंगे। तीसरे पक्ष की ओर से कोई मध्यस्थता नहीं की जाएगी। शिमला समझौते में और क्या-क्या शर्तें तय की गई थीं, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है शिमला समझौता?

1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद उनके 90 हजार से ज्यादा सैनिकों को युद्ध बंदी बनाया गया था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार, पाक युद्ध बंदियों को छुड़ाने की कवायद शुरू हुई। फिर दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध के लिए 2 जुलाई 1972 को शिमला में एक समझौता हुआ। 

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क्या है समझौते की अहम बातें?

  • दोनों देशों ने 17 सितंबर 1971 को युद्ध विराम के रूप में मान्यता दी। तय हुआ कि इस समझौते के 20 दिनों के अंदर दोनों देशों की सेनाएं अपनी-अपनी सीमा में चली जाएंगी।
  • यह भी तय हुआ कि दोनों देशों/सरकारों के अध्यक्ष भविष्य में भी मिलते रहेंगे। संबंध सामान्य बनाए रखने के दोनों देशों के अधिकारी बातचीत करते रहेंगे।
  • दोनों देश सभी विवादों और समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सीधी बातचीत करेंगे। तीसरे पक्ष द्वारा कोई मध्यस्थता नहीं की जाएगी।
  • यातायात की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। ताकि दोनों देशों के लोग आसानी से आ-जा सकें।
  • जहां तक संभव होगा, व्यापार और आर्थिक सहयोग फिर से स्थापित किए जाएंगे।
  • अगर दोनों देशों के बीच किसी समस्या का अंतिम निपटारा नहीं हो पाता है और मामला लंबित रहता है, तो दोनों पक्ष में से कोई भी स्थिति में बदलाव करने की एकतरफा कोशिश नहीं करेगा।
  • दोनों पक्ष ऐसे कृत्यों के लिए सहायता, प्रोत्साहन या सहयोग नहीं करेंगे जो शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में हानिकारक हैं।
  • दोनों देश एक दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। समानता एवं आपसी लाभ के आधार पर एक-दूसरे के आंतरिक मामले में दखल नहीं देंगे। 
  • दोनों सरकारें अपने अधिकार के अंदर ऐसे उग्र प्रॉपेगेंडा को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएंगी जिनके निशाने पर दोनों में से कोई देश हों। दोनों देश इस तरह की सूचनाएं आपस में साझा करने को प्रोत्साहन देंगे।
  • संचार के लिए डाक, टेलीग्राफ सेवा, समुद्र, सीमा डाक समेत सतही संचार माध्यमों, उड़ान समेत हवाई लिंक बहाल करेंगे।
  • शांति की स्थापना, युद्धबंदियों और शहरी बंदियों की अदला-बदला के सवाल, जम्मू-कश्मीर के अंतिम निपटारे और राजनयिक संबंधों को सामान्य करने की संभावनाओं पर काम करने के लिए दोनों पक्षों के प्रतिनिधि मिलते रहेंगे और आपस में चर्चा करेंगे।
  • दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि जहां तक संभव होगा आर्थिक और अन्य सहमति वाले क्षेत्रों में व्यापार और सहयोग बढ़ेगा।
  • विज्ञान और संस्कृति के मैदान में आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की सहमति बनी।

शिमला समझौते पर कहां बनी थी सहमति?

दो जुलाई 1972 को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बार्नेस कोर्ट में हुई बैठक में दोनों देश समझौते पर सहमत हुए थे। इस समझौते पर भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए थे। इसीलिए इसे शिमला समझौता कहा जाता है।  बार्नेस कोर्ट वर्तमान में राजभवन है। राजभवन में आज भी शिमला समझौते की निशानियां मौजूद हैं।  इस समझौते में दोनों देशों ने शांतिपूर्ण तरीकों और बातचीत के जरिए अपने मतभेदों का समाधान करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

शिमला समझौते के अस्तित्व में नहीं रहने का क्या मतलब?

पाकिस्तान की ओर से भारत संग द्विपक्षीय समझौतों को स्थगित करने के अधिकार का उपयोग बिना सोच-विचार के उठाया गया है। दरअसल, दोनों के बीच 1972 में हुए शिमला समझौते का निलंबन आतंकियों के पनाहगाह पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। शिमला समझौते का मुख्य बिंदु नियंत्रण रेखा (एलओसी) की पवित्रता को बनाए रखना है। समझौता निलंबित होने का अर्थ है कि कोई भी पक्ष एलओसी को मानने के लिए बाध्य नहीं है और भारत एलओसी को पार कर कोई भी कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बीते दिनों जारी एक बयान के अनुसार पाकिस्तान भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौतों को स्थगित करने के अधिकार का प्रयोग करेगा। इसमें शिमला समझौता भी शामिल है और यह कार्रवाई केवल इसी तक सीमित नहीं है। यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान ने बयान में यह नहीं कहा कि वह अधिकार के इस्तेमाल को सुरक्षित रखता है, बल्कि उसने कहा है कि वह अधिकार का प्रयोग करेगा। इसका अर्थ है कि आज, कल या बहुत जल्द वह निश्चित रूप से इन सभी समझौतों को निलंबित करेगा।

शिमला समझौता खत्म मतलब भारत पार कर सकता है नियंत्रण रेखा

बयान का अर्थ समझें तो पाकिस्तान यह कह रहा है कि अब एलओसी अस्तित्व में नहीं है। इसका मतलब है कि भारत एलओसी पार कर सकता है। शिमला समझौते ने एलओसी को स्थायी सीमा के रूप में मान्यता दी थी। इसके तहत दोनों देशों ने बल प्रयोग न करने और नियंत्रण रेखा का सम्मान करने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसके निलंबन पर भारत नियंत्रण रेखा के पार विशेष रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अधिक आक्रामक रणनीति अपना सकता है। भारत पीओके के लोगों के साथ सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। इसका खामियाजा पाकिस्तान को उठाना पड़ सकता है।

कश्मीर पर भारत का रुख और मजबूत होगा

शिमला समझौता कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बनाए रखने का आधार है। यह समझौता दोनों देशों को आपसी बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए बाध्य करता है। इसके निलंबन से भारत को मजबूत तर्क मिल जाएगा कि पाकिस्तान ने स्वयं ही इस समझौते को खारिज कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, भारत कश्मीर पर अपनी नीतियों को और मजबूत करने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा।

कूटनीतिक विश्वसनीयता को नुकसान

समझौते के निलंबन से पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर कूटनीतिक विश्वसनीयता और कमजोर होगी। वैश्विक समुदाय इसे गैर-जिम्मेदाराना कदम के रूप में देखेगा और पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव बढ़ सकता है। ऐसे में, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना और भी मुश्किल हो जाएगा।

पाकिस्तान ने कब किया शिमला समझौते का उल्लंघन

1972 में हुए शिमला समझौते में दोनों देशों ने बातचीत के जरिए समस्याओं को हल करने पर सहमति जताई थी, लेकिन  पाकिस्तान ने 1999 में शिमला समझौते का उल्लंघन किया था, जब पाकिस्तानी सैनिक जम्मू और कश्मीर के भारतीय क्षेत्र में घुस गए थे। इसके बाद भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया था, इसे कारगिल युद्ध के तौर पर जाना जाता है।

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