अब घोटाले में दोषी आशा कुमारी को पंजाब प्रभारी बनाने पर कांग्रेस घिरी
2017 में यूपी और पंजाब के प्रस्तावित चुनाव से पहले दागियों पर दांव लगाकर कांग्रेस शुरुआती जंग में बुरी तरह घिर गई है। उसने राजनीतिक विरोधियों को हमला करने का मौका दे दिया है। कांग्रेस इस मामले में पूरी तरह बचाव की मुद्रा में तो है, लेकिन वह अपनी गलती छिपाने के लिए विरोधियों पर हमलावर है।
करोड़ों के टैंकर घोटाले में घिरने के बाद अब शीला दीक्षित ने खुद यूपी जाने से इनकार कर दिया। पार्टी ने अब तय किया है कि आगे से जिम्मेदारी देने से पहले वह संबंधित नेता की कुंडली खंगालेगी।
कांग्रेस ने पंजाब और यूपी चुनाव में कामयाबी के लिए काफी दिन से तैयारी कर रखी है। लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर को पार्टी ने अपने साथ मिला लिया है। उसके बाद भी पार्टी विवादों में उलझती जा रही है। कांग्रेस ने कमलनाथ को पंजाब का प्रभारी बनाया। विरोधी दलों के हमले और 1984 के सिख दंगों में नाम उछलने के बाद उनको चार्ज संभालने से पहले ही इस पद छोड़ना पड़ा।
उसके बाद पंजाब प्रभारी और यूपी में बतौर सीएम के चेहरे के तौर पर दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित का नाम आगे किया। विपक्ष के हमले के बाद करोड़ों के टैंकर घोटाले में एफआईआर हो गई, जिसमें पूर्ववर्ती शीला दीक्षित सरकार का भी जिक्र है। अब शीला ने खुद ही यूपी जाने से इनकार कर दिया।
शीला के पंजाब और यूपी के लिए ना कहने पर पार्टी ने आशा कुमारी को पंजाब का प्रभारी बनाने की घोषणा कर दी। आशा कुमारी एक जमीन घोटाले में घिरी हैं। उनको एक साल की सजा अदालत से हो चुकी है। फिलहाल वह जमानत पर हैं।
इस निर्णय को लेकर कांग्रेस की किरकिरी हो रही है। भाजपा और आप दोनों कांग्रेस पर लगातार हमले कर रहे हैं।
हालांकि कांग्रेस अपने गलत निर्णय से बचने के लिए भाजपा के दागियों के नाम गिनाकर हमले करने लगी है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कहना है कि आशा कुमारी का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर हत्या का मामला है। येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार का केस है। यूपी भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ 10 केस हैं।
Published By Rahul Sankrityayan