कांग्रेस अध्यक्ष बनने के पहले शीला दीक्षित ने आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन के संकेत दिये थे। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन को इस संभावित गठबंधन की राह में रोड़े के तौर पर देखा जा रहा था। उम्मीद थी कि अजय माकन के जाते ही गठबंधन की राह तैयार कर दी जाएगी, लेकिन हाल ही में दोनों पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी से दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन बनने की संभावना अमल में आती नहीं दिख रही।
दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित ने अध्यक्ष के रुप में पद संभालते ही अरविंद केजरीवाल को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान न करने वाला आदमी बताया और कहा कि ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल दिल्ली को नहीं समझते हैं और उनकी पार्टी से गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।
वहीं अरविंद केजरीवाल ने भी अपनी सभाओं में कांग्रेस पर हमला करना तेज कर दिया है। शनिवार को एक सभा में उन्होंने एक बार फिर अपने पुराने तेवर में कहा कि कांग्रेस को वोट करने का मतलब है कि भाजपा को वोट देना। क्योंकि वह खुद तो जीतने में सक्षम नहीं है लेकिन वोट काटकर भाजपा की जीत की राह तैयार कर देती है।
...और इस तरह फंस गया पेच
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सबसे बड़ी समस्य़ा यह है कि अगर दिल्ली में लोकसभा चुनाव में आप पार्टी के साथ गठबंधन हो भी जाता है तो उसके साल भर के अंदर ही दिल्ली विधानसभा के चुनाव होने हैं। उस स्थिति में पार्टी को दिल्ली में वापसी के लिए केजरीवाल सरकार पर हमला करना होगा जो ऐसी स्थिति में उचित नहीं होगा।
नेता के मुताबिक पार्टी के ज्यादातर नेताओं की राय है कि चाहे लोकसभा चुनाव का परिणाम जो भी हो, लेकिन दिल्ली में पार्टी की जमीन तैयार करने के लिए चुनाव में अकेले ही जाने में समझदारी है। पार्टी की इसी सोच का परिणाम शीला और केजरीवाल के हमलावर शब्दों में साफ मिल जाता है।
एक अन्य नेता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के पास आज जो वोट है कमोबेश वह कांग्रेस का ही वोट है। इसलिए अगर उसे दिल्ली में वापसी करनी है तो उसके लिए आप को उखाड़ना होगा जो गठबंधन रहते नहीं किया जा सकता।