सांसद थरूर ने बताया कि युद्ध की वजह से तेल के उत्पादन, निर्यात और सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। जो कच्चा तेल कुछ समय पहले तक 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रहा है।
Shashi Tharoor On Oil Price Hike: ईरान-इस्राइल के बीच छिड़ी जंग अब केवल सरहदों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला बोल दिया है। तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वैश्विक तेल संकट पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारतीय उद्योगों में तालाबंदी की नौबत आ सकती है। अब सवाल उठता है कि क्या सच में भारत में फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी?
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रॉकेट की रफ्तार से बढ़ते दाम
सांसद थरूर ने बताया कि युद्ध की वजह से तेल के उत्पादन, निर्यात और सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। जो कच्चा तेल कुछ समय पहले तक 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रहा है। थरूर ने कहा कि सप्लाई बढ़ाने के लिए रूस और ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दी गई है, लेकिन यह 'ऊंट के मुंह में जीरे' के समान है।
भारत के लिए 'होर्मुज जलडमरूमध्य' बना बड़ी चुनौती
दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ताओं में से एक होने के नाते भारत के सामने दोहरी मुसीबत है। शशि थरूर ने कहा कि भारत हर संभव स्रोत से तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' और कतर के रास्तों पर तनाव बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
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बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक-तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। यहां जरा सी भी हलचल भारत के पेट्रोल पंपों पर कीमतों में आग लगा देती है।
बंद हो सकती हैं फैक्ट्रियां!
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि बढ़ते ईंधन और गैस के दामों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से न केवल महंगाई बढ़ रही है, बल्कि भारी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी बोझ बढ़ गया है। थरूर ने अंदेशा जताया कि यदि लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो देश की कई बड़ी फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद करना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर रोजगार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।