कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों कई मंदिरों में दर्शन करते हुए दिख जाते हैं। केवल इतना ही नहीं राहुल ने खुद को जनेऊधारी हिंदू और शिवभक्त तक बताया है। लेकिन उनके इस कदम ने भाजपा को उनपर हमला करने का एक हथियार दे दिया। सभी लोग कांग्रेस के अचानक पैदा हुए इस मंदिर प्रेम के बारे में जानना चाहते हैं। इसपर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने विस्तार से बताया।
शशि थरूर ने कहा, 'लंबे समय से हमें (कांग्रेस) लगता रहा है कि सार्वजनिक तौर पर अपनी निजी भावनाओं को व्यक्त क्यों करें। हम अपनी आस्था को फॉलो करते हैं लेकिन कभी उसे सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित करने के लिए बाध्य नहीं हुए। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस नेहरू के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत वाली पार्टी है जिसकी जड़े स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के विवेक का भाजपा ने इस्तेमाल किया और उसे सच्चे हिंदू और नास्तिक धर्मनिरपेक्ष की लड़ाई में बदल दिया।'
कांग्रेस नेता ने कहा, 'एक देश जिसमें धार्मिकता गहरी है। अगर बहस को उस तरह से फ्रेम किया जाए तो धर्मनिरपेक्षतावादी हमेशा हार जाता है। इसलिए हमने निर्णय लिया कि यही समय है जब हमें अपनी आस्था को दिखाना होगा।' चुनावी दौरों के दौरान राहुल के मंदिर दर्शन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इसे स्वार्थी अवसरवादी के तौर पर देखना गलत है। उन्होंने दावा किया कि राहुल जब खुद को शिव भक्त बताते हैं तो उन्हें अच्छी तरह से पता होता है कि वह क्या कह रहे हैं।
शशि थरूर ने कहा कि उनके मंदिर दर्शनों की तस्वीरें खींचे जाने से पहले मेरी उनसे धर्म और आध्यात्म पर बातचीत हुई है। वह बहुत विचारशील, धर्म और अध्यात्म के मसले पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले भारतीय राजनेता हैं। उनकी शिव केंद्रित संस्कृति और विष्णु केंद्रित संस्कृति को लेकर अवधारणा आपको हैरान कर देगी। वह बौद्ध विपासना और हिंदू विपासना के अतंर को बहुत अच्छी तरह से समझाने में सक्षम हैं। लोगों को इस बात का अहसास तक नहीं है कि यहां एक ऐसा लड़का है जो धर्म को लेकर काफी गंभीर है।